पारिवारिक कानून
शादी, तलाक · 10 सवाल
हम दोनों अलग होने पर राज़ी हैं। आपसी सहमति से तलाक कैसे होता है?
अगर आप दोनों कम से कम एक साल से अलग रह रहे हैं और दोनों राज़ी हैं, तो फैमिली कोर्ट में मिलकर अर्ज़ी दे सकते हैं। आख़िरी सुनवाई से पहले आमतौर पर 6 महीने का इंतज़ार होता है, जिसे कोर्ट कुछ मामलों में माफ़ कर सकता है। ईसाई दंपतियों को दो साल अलग रहना ज़रूरी है।
मेरा जीवनसाथी राज़ी नहीं है। मुझे किन आधारों पर तलाक मिल सकता है?
अगर आप फैमिली कोर्ट में कोई कानूनी आधार साबित करें, तो जीवनसाथी की मर्ज़ी के बिना भी तलाक मिल सकता है। आम आधार हैं: क्रूरता (मानसिक भी), दो साल तक छोड़ देना, व्यभिचार (adultery) और धर्म बदलना। पूरी सूची आपके पर्सनल लॉ (हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, पारसी) या स्पेशल मैरिज एक्ट पर निर्भर है।
मेरे पति मेरा खर्च नहीं उठाते। क्या मैं उनसे गुज़ारा-भत्ता माँग सकती हूँ?
हाँ। जो पत्नी अपना खर्च नहीं चला सकती, वह BNSS धारा 144 के तहत साधन वाले पति से हर महीने गुज़ारा-भत्ता माँग सकती है। यह हर धर्म की महिलाओं पर लागू है, और दोबारा शादी न करने वाली तलाकशुदा पत्नी पर भी। तलाक या घरेलू हिंसा के केस में भी यह माँगा जा सकता है।
जल्दी करें
मैं घर में हिंसा झेल रही हूँ। कानून मेरी रक्षा कैसे करता है?
अगर अभी खतरा है तो 112 पर कॉल करें। घरेलू हिंसा कानून हर धर्म की उस महिला की रक्षा करता है जिसे पति, पार्टनर या साथ रहने वाले (या रह चुके) परिवार के सदस्य सताते हैं। मजिस्ट्रेट हिंसा रोकने, साझा घर में रहने देने और पैसे दिलाने का आदेश दे सकता है।
जल्दी करें
मेरे ससुराल वाले दहेज के लिए परेशान कर रहे हैं। मैं क्या करूँ?
खतरा हो तो अभी 112 या 181 पर कॉल करें। दहेज माँगना अपराध है, और दहेज के लिए पत्नी को सताना BNS धारा 85 में क्रूरता है (3 साल तक जेल)। आप पुलिस में शिकायत कर सकती हैं, और सुरक्षा व अपना स्त्रीधन वापस भी माँग सकती हैं।
कोर्ट मैरिज कैसे करें? क्या माता-पिता की मंज़ूरी ज़रूरी है?
नहीं, बालिग़ों को माता-पिता की मंज़ूरी नहीं चाहिए। स्पेशल मैरिज एक्ट में 21+ साल का पुरुष और 18+ साल की महिला, किसी भी धर्म के हों, बिना धर्म बदले शादी कर सकते हैं। मैरिज ऑफिसर को नोटिस दें, आपत्ति के लिए 30 दिन रुकें, फिर तीन गवाहों के सामने शादी करें।
हम अलग हो रहे हैं। बच्चों की कस्टडी किसे मिलेगी?
कोई तय नियम नहीं है। कोर्ट देखता है कि बच्चे की भलाई किसमें है। 5 साल से छोटे बच्चे आमतौर पर माँ के पास रहते हैं। दूसरे माता या पिता को आमतौर पर मिलने का हक़ मिलता है, और कस्टडी न मिलने से बच्चे का खर्च उठाने की ज़िम्मेदारी खत्म नहीं होती।
मेरे बच्चे मेरी देखभाल नहीं करते। क्या मैं उनसे खर्च माँग सकता/सकती हूँ?
हाँ। जो माता-पिता और 60+ उम्र के वरिष्ठ नागरिक अपना खर्च नहीं चला सकते, वे अपने बालिग़ बच्चों या पोते-पोतियों से हर महीने खर्च माँग सकते हैं। मेंटेनेंस ट्रिब्यूनल (आमतौर पर SDM ऑफिस) में अर्ज़ी दें; वकील की ज़रूरत नहीं। ट्रिब्यूनल ₹10,000 महीने तक दिला सकता है। BNSS धारा 144 में भी माँग सकते हैं।
क्या शादी का रजिस्ट्रेशन ज़रूरी है? मैं कैसे कराऊँ?
हाँ, कई राज्यों में यह ज़रूरी है, और सुप्रीम कोर्ट ने सभी शादियों के रजिस्ट्रेशन का निर्देश दिया है। लेकिन सिर्फ़ रजिस्ट्रेशन न होने से सही तरीके से हुई शादी अवैध नहीं होती। ID, उम्र का सबूत, फोटो और गवाहों के साथ मैरिज रजिस्ट्रार ऑफिस में या ऑनलाइन रजिस्टर कराएँ।
हम बिना शादी के साथ रहना चाहते हैं। क्या लिव-इन रिलेशनशिप कानूनी है?
हाँ। सुप्रीम कोर्ट कह चुका है कि दो बालिग़ों का अपनी मर्ज़ी से साथ रहना अपराध नहीं है। लंबे, शादी जैसे लिव-इन रिश्ते में रह रही महिला घरेलू हिंसा कानून से सुरक्षा और खर्च माँग सकती है। उत्तराखंड में लिव-इन जोड़ों को रिश्ते का रजिस्ट्रेशन कराना ज़रूरी है।
यह शैक्षिक जानकारी है, आपके केस के लिए कानूनी सलाह नहीं। सही तथ्य और लागू कानून मायने रखते हैं — कोई कदम उठाने से पहले वकील से बात करें।