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पारिवारिक कानून

क्या शादी का रजिस्ट्रेशन ज़रूरी है? मैं कैसे कराऊँ?

सीधा जवाब

हाँ, कई राज्यों में यह ज़रूरी है, और सुप्रीम कोर्ट ने सभी शादियों के रजिस्ट्रेशन का निर्देश दिया है। लेकिन सिर्फ़ रजिस्ट्रेशन न होने से सही तरीके से हुई शादी अवैध नहीं होती। ID, उम्र का सबूत, फोटो और गवाहों के साथ मैरिज रजिस्ट्रार ऑफिस में या ऑनलाइन रजिस्टर कराएँ।

असल ज़िंदगी के उदाहरण

अनिल और रेखा की शादी मंदिर में हिंदू रीति से हुई। एक महीने बाद वे शादी का कार्ड, फोटो, उम्र के सबूत और गवाहों के साथ सब-रजिस्ट्रार के पास जाकर मैरिज सर्टिफिकेट लेते हैं। रेखा को यह पासपोर्ट और वीज़ा के लिए चाहिए।

शबनम का पति गुज़ारा-भत्ता न देने के लिए शादी से ही मुकर जाता है। उसका निकाहनामा और रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट शादी होने का मज़बूत सबूत हैं।

रवि और मीना की शादी 2018 में हुई, पर रजिस्ट्रेशन नहीं कराया। उनकी शादी फिर भी वैध है। वे अब भी रजिस्टर करा सकते हैं; कई राज्य अतिरिक्त फीस के साथ देर से रजिस्ट्रेशन की अनुमति देते हैं।

आपको क्या करना चाहिए?

  1. 1सही दफ़्तर पता करें: जहाँ शादी हुई या जहाँ आप में से कोई रहता है, वहाँ का मैरिज रजिस्ट्रार या सब-रजिस्ट्रार। कई राज्यों में पहले ऑनलाइन आवेदन होता है।
  2. 2उम्र का सबूत (जन्म प्रमाण पत्र, 10वीं का सर्टिफिकेट या पासपोर्ट), पते का सबूत, पासपोर्ट फोटो, शादी का कार्ड या फोटो, और ID के साथ गवाह ले जाएँ।
  3. 3अगर आप में से किसी की पहले शादी हुई थी, तो तलाक की डिक्री या पूर्व जीवनसाथी का मृत्यु प्रमाण पत्र साथ रखें।
  4. 4दी गई तारीख पर गवाहों के साथ दोनों जाएँ, रजिस्टर पर साइन करें और मैरिज सर्टिफिकेट लें।
  5. 5कॉपियाँ संभालकर रखें। पासपोर्ट, वीज़ा, बैंक, बीमा और संपत्ति के कामों में सर्टिफिकेट लगेगा।

अपवाद और ज़रूरी बातें

  • स्पेशल मैरिज एक्ट वाली शादी उसी समय रजिस्टर हो जाती है; मैरिज ऑफिसर सर्टिफिकेट देता है, इसलिए अलग रजिस्ट्रेशन की ज़रूरत नहीं।
  • रजिस्ट्रेशन किसी गैरकानूनी शादी को वैध नहीं बना सकता, जैसे ऐसी दूसरी शादी जिसकी आपका कानून इजाज़त नहीं देता (हिंदुओं में, पहले जीवनसाथी के ज़िंदा रहते)।
  • चर्च में हुई शादियाँ और पारसी शादियाँ अपने-अपने विवाह कानूनों के तहत दर्ज होती हैं, जिनके अपने रजिस्टर और सर्टिफिकेट होते हैं।

आधिकारिक कानूनी संदर्भ

  • Hindu Marriage Act, 1955 — Section 8

    राज्य हिंदू शादियों के रजिस्ट्रेशन के नियम बनाकर इसे ज़रूरी कर सकते हैं; रजिस्ट्रेशन न होने से शादी अवैध नहीं होती।

  • Seema v. Ashwani Kumar (2006)

    हर धर्म के नागरिकों की शादी का रजिस्ट्रेशन ज़रूरी होना चाहिए; राज्य इसके नियम बनाएँ।

  • Special Marriage Act, 1954 — Section 13

    मैरिज ऑफिसर शादी को मैरिज सर्टिफिकेट बुक में दर्ज करता है; यह शादी का पक्का सबूत है।

  • Indian Christian Marriage Act, 1872

    ईसाई शादियाँ कैसे होती हैं और विवाह रजिस्टर में कैसे दर्ज होती हैं।

स्रोत और स्थिति

कहाँ लागू
राज्य के अनुसार अलग
नियम, फीस, समय-सीमा और दफ़्तर हर राज्य में अलग हैं; कई राज्यों में ऑनलाइन पोर्टल है। उत्तराखंड में 27 जनवरी 2025 से हुई शादियों का UCC के तहत 60 दिन में रजिस्ट्रेशन ज़रूरी है। गोवा की अपनी व्यवस्था है।
कानून लागू होने की तारीख
18 मई 1955
कानूनी समीक्षा
ड्राफ्ट — वकील की समीक्षा बाकी

यह शैक्षिक जानकारी है, आपके केस के लिए कानूनी सलाह नहीं। सही तथ्य और लागू कानून मायने रखते हैं — कोई कदम उठाने से पहले वकील से बात करें।

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