कानून समझोभारतीय कानून, आसान भाषा में
पारिवारिक कानून

हम दोनों अलग होने पर राज़ी हैं। आपसी सहमति से तलाक कैसे होता है?

सीधा जवाब

अगर आप दोनों कम से कम एक साल से अलग रह रहे हैं और दोनों राज़ी हैं, तो फैमिली कोर्ट में मिलकर अर्ज़ी दे सकते हैं। आख़िरी सुनवाई से पहले आमतौर पर 6 महीने का इंतज़ार होता है, जिसे कोर्ट कुछ मामलों में माफ़ कर सकता है। ईसाई दंपतियों को दो साल अलग रहना ज़रूरी है।

असल ज़िंदगी के उदाहरण

प्रिया और करण हिंदू हैं और 14 महीने से अलग रह रहे हैं। गुज़ारा-भत्ते और बेटे की कस्टडी पर दोनों राज़ी हैं, इसलिए वे मिलकर अर्ज़ी देते हैं। पहली सुनवाई के 6 महीने बाद वे दूसरी सुनवाई में फिर सहमति देते हैं और तलाक की डिक्री मिल जाती है।

गुरप्रीत और हरमन सिख दंपति हैं और तीन साल से अलग रह रहे हैं। सुलह की कोशिश नाकाम रही और सारे मुद्दे तय हो चुके हैं। वे फैमिली कोर्ट से 6 महीने का इंतज़ार माफ़ करने को कहते हैं। कोर्ट मान सकता है, क्योंकि इंतज़ार से सिर्फ़ तकलीफ़ बढ़ेगी।

आपको क्या करना चाहिए?

  1. 1पहले सब कुछ लिखित में तय करें: गुज़ारा-भत्ता, गहने और स्त्रीधन की वापसी, बच्चों की कस्टडी और मिलना-जुलना, और बाकी चल रहे केस वापस लेना।
  2. 2जहाँ शादी हुई, जहाँ आप आख़िरी बार साथ रहे, या जहाँ पत्नी अभी रहती है, वहाँ के फैमिली कोर्ट में मिलकर अर्ज़ी दें।
  3. 3पहली सुनवाई (फर्स्ट मोशन) में साथ जाएँ। शादी का सबूत, पते का सबूत, फोटो और साइन किया हुआ समझौता साथ रखें।
  4. 4अर्ज़ी के 6 से 18 महीने के बीच दूसरी सुनवाई (सेकंड मोशन) के लिए आएँ। पहले ही 18 महीने से ज़्यादा अलग रह चुके हों, तो इंतज़ार माफ़ कराने पर वकील से पूछें।
  5. 5तलाक की डिक्री की सर्टिफाइड कॉपी लें और पासपोर्ट, बैंक जैसे रिकॉर्ड अपडेट कराएँ।
  6. 6वकील का खर्च नहीं उठा सकते? मुफ्त कानूनी सहायता के लिए NALSA को 15100 पर कॉल करें।

अपवाद और ज़रूरी बातें

  • आख़िरी डिक्री से पहले पति या पत्नी में से कोई भी सहमति वापस ले सकता है। तब कोर्ट आपसी सहमति से तलाक नहीं दे सकता, और दूसरे को कानूनी आधार पर अलग केस करना होगा।
  • मुस्लिम दंपति मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत आपसी समझौते (मुबारात) या खुला से भी शादी खत्म कर सकते हैं। पारसी दंपतियों को एक साल और ईसाई दंपतियों को दो साल अलग रहना होता है।

आधिकारिक कानूनी संदर्भ

  • Hindu Marriage Act, 1955 — Section 13B

    हिंदू, सिख, जैन और बौद्ध: एक साल अलग रहने के बाद संयुक्त अर्ज़ी; दूसरी सुनवाई 6 से 18 महीने के बीच।

  • Special Marriage Act, 1954 — Section 28

    स्पेशल मैरिज एक्ट वाली शादियों (कोर्ट मैरिज, अंतर-धार्मिक शादी) के लिए यही प्रक्रिया।

  • Divorce Act, 1869 — Section 10A

    ईसाई: दो साल अलग रहने के बाद संयुक्त अर्ज़ी; दूसरी सुनवाई 6 से 18 महीने के बीच।

  • Parsi Marriage and Divorce Act, 1936 — Section 32B

    पारसी: एक साल या ज़्यादा अलग रहने के बाद आपसी सहमति से तलाक।

  • Amardeep Singh v. Harveen Kaur (2017)

    सुप्रीम कोर्ट: 6 महीने का इंतज़ार ज़रूरी नहीं; सही मामलों में कोर्ट इसे माफ़ कर सकता है।

मदद कहाँ मिलेगी

नालसा मुफ्त कानूनी सहायता

पात्र लोगों के लिए मुफ्त वकील और कानूनी सलाह।

स्रोत और स्थिति

कहाँ लागू
राज्य के अनुसार अलग
उत्तराखंड में 27 जनवरी 2025 से लागू समान नागरिक संहिता (UCC) ज़्यादातर निवासियों के तलाक पर लागू है, और गोवा का अपना पारिवारिक कानून है। स्थानीय फैमिली कोर्ट की प्रक्रिया जाँच लें।
कानून लागू होने की तारीख
27 मई 1976
कानूनी समीक्षा
ड्राफ्ट — वकील की समीक्षा बाकी

यह शैक्षिक जानकारी है, आपके केस के लिए कानूनी सलाह नहीं। सही तथ्य और लागू कानून मायने रखते हैं — कोई कदम उठाने से पहले वकील से बात करें।

जुड़े हुए सवाल