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पारिवारिक कानून

जल्दी करें

मैं घर में हिंसा झेल रही हूँ। कानून मेरी रक्षा कैसे करता है?

सीधा जवाब

अगर अभी खतरा है तो 112 पर कॉल करें। घरेलू हिंसा कानून हर धर्म की उस महिला की रक्षा करता है जिसे पति, पार्टनर या साथ रहने वाले (या रह चुके) परिवार के सदस्य सताते हैं। मजिस्ट्रेट हिंसा रोकने, साझा घर में रहने देने और पैसे दिलाने का आदेश दे सकता है।

असल ज़िंदगी के उदाहरण

कविता का पति उसे थप्पड़ मारता है और सास बेटा न होने पर रोज़ ताने देती है। मारपीट और ये ताने, दोनों घरेलू हिंसा हैं। प्रोटेक्शन ऑफिसर की मदद से कविता दोनों के खिलाफ मजिस्ट्रेट से सुरक्षा आदेश माँगती है।

रेहाना के ससुराल वाले कहते हैं कि घर ससुर के नाम है और उसे निकालना चाहते हैं। यह उसका साझा घर है, इसलिए मालिक न होते हुए भी उसे वहाँ रहने का हक़ है, और उसे सिर्फ़ कानूनी प्रक्रिया से ही हटाया जा सकता है।

68 साल की मोहिनी को उनका बालिग़ बेटा पीटता है। घरेलू हिंसा कानून सिर्फ़ पत्नियों की नहीं, परिवार में रहने वाली माँ, बहन और विधवा की भी रक्षा करता है।

आपको क्या करना चाहिए?

  1. 1खतरा हो तो 112 पर कॉल करें या किसी सुरक्षित जगह जाएँ। रहने की जगह, काउंसलिंग और वन स्टॉप सेंटर के लिए 181 (महिला हेल्पलाइन) पर कॉल करें।
  2. 2इलाज कराएँ और डॉक्टर से चोटें रिकॉर्ड करने को कहें। फोटो, मैसेज और गवाहों के नाम ऐसी जगह रखें जहाँ हिंसा करने वाला न पहुँचे।
  3. 3अपने ज़िले के प्रोटेक्शन ऑफिसर से (181, पुलिस या कोर्ट के ज़रिए) संपर्क करें और घरेलू घटना रिपोर्ट (DIR) दर्ज कराएँ।
  4. 4DV एक्ट की धारा 12 के तहत मजिस्ट्रेट को अर्ज़ी दें। तुरंत अंतरिम आदेश माँगें; पहली सुनवाई आमतौर पर 3 दिन के अंदर होती है।
  5. 5आप क्रूरता (BNS धारा 85) के लिए पुलिस में शिकायत भी कर सकती हैं। FIR की मुफ्त कॉपी माँगें।
  6. 6मुफ्त वकील के लिए NALSA को 15100 पर कॉल करें।

अपवाद और ज़रूरी बातें

  • इस कानून में पीड़ित के तौर पर सिर्फ़ महिला अर्ज़ी दे सकती है। घर में हिंसा झेल रहे पुरुष चोट या धमकी जैसे सामान्य आपराधिक कानून का सहारा ले सकते हैं।
  • लिव-इन पार्टनर तभी कवर होती है जब रिश्ता 'शादी जैसा' हो, जैसे लंबे समय तक पति-पत्नी की तरह साथ रहना।
  • DV एक्ट के आदेश आपकी रक्षा करते हैं, पर सज़ा नहीं देते। सज़ा के लिए अलग आपराधिक केस, जैसे BNS धारा 85 में क्रूरता, चाहिए। सुरक्षा आदेश तोड़ना खुद एक अपराध है।

आधिकारिक कानूनी संदर्भ

  • Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005 — Section 3

    घरेलू हिंसा क्या है: शारीरिक, यौन, मौखिक, भावनात्मक और आर्थिक शोषण, दहेज की माँग समेत।

  • Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005 — Sections 12, 17, 19

    मजिस्ट्रेट को अर्ज़ी; महिला का साझा घर में रहने का हक़; रहने से जुड़े आदेश।

  • Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005 — Sections 18, 20, 23, 31

    सुरक्षा आदेश, आर्थिक राहत और तुरंत अंतरिम आदेश। सुरक्षा आदेश तोड़ने पर 1 साल तक जेल, ₹20,000 जुर्माना या दोनों।

  • Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 — Sections 85, 86

    पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा पत्नी के साथ क्रूरता: 3 साल तक जेल और जुर्माना।

  • Satish Chander Ahuja v. Sneha Ahuja (2020)

    अगर ससुराल का घर साझा घर है, तो पत्नी वहाँ रहने का हक़ माँग सकती है।

मदद कहाँ मिलेगी

आपातकालीन सेवा

किसी भी आपात स्थिति में पुलिस, फायर या एम्बुलेंस।

महिला हेल्पलाइन

हिंसा झेल रही महिलाओं के लिए 24x7 सहायता और वन स्टॉप सेंटर।

राष्ट्रीय महिला आयोग

महिलाओं के खिलाफ हिंसा और उत्पीड़न की शिकायत।

नालसा मुफ्त कानूनी सहायता

पात्र लोगों के लिए मुफ्त वकील और कानूनी सलाह।

स्रोत और स्थिति

कहाँ लागू
पूरे भारत में
कानून लागू होने की तारीख
26 अक्टू॰ 2006
कानूनी समीक्षा
ड्राफ्ट — वकील की समीक्षा बाकी

यह शैक्षिक जानकारी है, आपके केस के लिए कानूनी सलाह नहीं। सही तथ्य और लागू कानून मायने रखते हैं — कोई कदम उठाने से पहले वकील से बात करें।

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