मेरे पति मेरा खर्च नहीं उठाते। क्या मैं उनसे गुज़ारा-भत्ता माँग सकती हूँ?
सीधा जवाब
हाँ। जो पत्नी अपना खर्च नहीं चला सकती, वह BNSS धारा 144 के तहत साधन वाले पति से हर महीने गुज़ारा-भत्ता माँग सकती है। यह हर धर्म की महिलाओं पर लागू है, और दोबारा शादी न करने वाली तलाकशुदा पत्नी पर भी। तलाक या घरेलू हिंसा के केस में भी यह माँगा जा सकता है।
असल ज़िंदगी के उदाहरण
पति की मारपीट के बाद सुनीता ससुराल छोड़कर आ गई। पति अच्छा कमाता है पर उसे या बेटी को कुछ नहीं भेजता। वह फैमिली कोर्ट में BNSS धारा 144 के तहत अर्ज़ी देती है और केस चलने तक अंतरिम गुज़ारा-भत्ता माँगती है।
फ़ातिमा के पति ने उसे तलाक दे दिया। दोबारा शादी न करने वाली तलाकशुदा मुस्लिम महिला होने के नाते वह BNSS धारा 144 में गुज़ारा-भत्ता माँग सकती है, जैसा सुप्रीम कोर्ट ने 2024 में साफ़ किया। वह मुस्लिम महिला (तलाक पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 1986 का भी सहारा ले सकती है।
बीमारी की वजह से विक्रम की नौकरी चली गई, जबकि उसकी पत्नी अच्छा कमाती है। BNSS धारा 144 में सिर्फ़ पत्नी माँग सकती है, लेकिन हिंदू मैरिज एक्ट वाले तलाक केस में विक्रम पत्नी से अंतरिम गुज़ारा-भत्ता माँग सकता है।
आपको क्या करना चाहिए?
- 1पति की कमाई और संपत्ति के सबूत जुटाएँ: सैलरी स्लिप, बैंक स्टेटमेंट, प्रॉपर्टी के कागज़, बिज़नेस की जानकारी।
- 2अपनी महीने की ज़रूरतें लिखें: किराया, खाना, स्कूल फीस, दवाइयाँ। अपनी कमाई के बारे में सच बताएँ।
- 3जहाँ आप रहती हैं, जहाँ पति रहता है, या जहाँ आप आख़िरी बार साथ रहे, वहाँ के फैमिली कोर्ट (या मजिस्ट्रेट कोर्ट) में अर्ज़ी दें।
- 4शुरुआत में ही अंतरिम गुज़ारा-भत्ता माँगें। दोनों पक्षों को अपनी कमाई और संपत्ति का हलफ़नामा देना होता है (रजनेश बनाम नेहा, 2020)।
- 5अगर पति पैसे देना बंद कर दे, तो बकाया होने के एक साल के अंदर कोर्ट में वसूली की अर्ज़ी दें।
- 6वकील का खर्च नहीं उठा सकतीं? मुफ्त कानूनी सहायता के लिए NALSA को 15100 पर कॉल करें।
अपवाद और ज़रूरी बातें
- BNSS धारा 144 में पत्नी को गुज़ारा-भत्ता नहीं मिल सकता अगर वह व्यभिचार में रह रही हो, बिना ठोस वजह पति के साथ रहने से मना करे, या दोनों आपसी सहमति से अलग रहते हों।
- अगर आप इतना कमाती हैं कि शादी जैसा जीवन-स्तर बना रहे, तो कोर्ट गुज़ारा-भत्ता घटा या मना कर सकता है। काम करने लायक पति सिर्फ़ 'नौकरी नहीं है' कहकर बच नहीं सकता।
- एक केस में मिला पैसा आमतौर पर दूसरे केस में एडजस्ट होता है, इसलिए एक ही समय के लिए दोगुना गुज़ारा-भत्ता नहीं मिलता।
आधिकारिक कानूनी संदर्भ
Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 — Sections 144, 145
खुद का खर्च न चला सकने वाली पत्नी, बच्चों और माता-पिता के लिए मासिक गुज़ारा-भत्ता; अंतरिम राहत; केस कहाँ करें।
पहले: CrPC Sections 125, 126आधिकारिक पाठ पढ़ेंHindu Marriage Act, 1955 — Sections 24, 25
हिंदू शादी के केस में, कम आय वाले पति या पत्नी के लिए अंतरिम और स्थायी गुज़ारा-भत्ता।
Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005 — Section 20
घरेलू हिंसा झेल रही महिला के लिए आर्थिक राहत, जिसमें गुज़ारा-भत्ता और खर्च शामिल हैं।
Rajnesh v. Neha (2020)
दोनों पक्ष आय और संपत्ति बताएँ; गुज़ारा-भत्ता आमतौर पर अर्ज़ी की तारीख से; अलग-अलग केस की रकम एडजस्ट होगी।
Mohd. Abdul Samad v. State of Telangana (2024)
तलाकशुदा मुस्लिम महिला सामान्य कानून (तब CrPC धारा 125, अब BNSS धारा 144) में भी गुज़ारा-भत्ता माँग सकती है।
मदद कहाँ मिलेगी
स्रोत और स्थिति
- कहाँ लागू
- पूरे भारत में
- कानून लागू होने की तारीख
- 1 जुल॰ 2024
- कानूनी समीक्षा
- ड्राफ्ट — वकील की समीक्षा बाकी
यह शैक्षिक जानकारी है, आपके केस के लिए कानूनी सलाह नहीं। सही तथ्य और लागू कानून मायने रखते हैं — कोई कदम उठाने से पहले वकील से बात करें।
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