हम बिना शादी के साथ रहना चाहते हैं। क्या लिव-इन रिलेशनशिप कानूनी है?
सीधा जवाब
हाँ। सुप्रीम कोर्ट कह चुका है कि दो बालिग़ों का अपनी मर्ज़ी से साथ रहना अपराध नहीं है। लंबे, शादी जैसे लिव-इन रिश्ते में रह रही महिला घरेलू हिंसा कानून से सुरक्षा और खर्च माँग सकती है। उत्तराखंड में लिव-इन जोड़ों को रिश्ते का रजिस्ट्रेशन कराना ज़रूरी है।
असल ज़िंदगी के उदाहरण
26 साल के नेहा और सिद्धार्थ बिना शादी बेंगलुरु में साथ फ़्लैट लेकर रहते हैं। यह कानूनी है, और सिर्फ़ साथ रहने के लिए पुलिस उन पर कार्रवाई नहीं कर सकती।
रोशनी आठ साल अमन के साथ रही, खर्च बाँटे और लोग उसे अमन की पत्नी मानते थे। जब अमन ने उसे मारना शुरू किया और खर्च देना बंद कर दिया, तो उसने DV एक्ट में सुरक्षा और पैसे की अर्ज़ी दी, क्योंकि उनका रिश्ता 'शादी जैसा' था।
पिंकी यह जानते हुए सुरेश के साथ रहने लगी कि वह पहले से शादीशुदा है। कोर्ट कह चुके हैं कि ऐसा रिश्ता आमतौर पर 'शादी जैसा' नहीं माना जाता, इसलिए पार्टनर के तौर पर उसे DV एक्ट की राहत शायद न मिले। उनका बच्चा फिर भी सुरेश से खर्च माँग सकता है।
आपको क्या करना चाहिए?
- 1पक्का करें कि आप दोनों बालिग़ (18+) हैं। 18 साल से कम उम्र के व्यक्ति से शारीरिक संबंध, सहमति होने पर भी, गंभीर अपराध है।
- 2साथ रहने का आसान सबूत रखें: दोनों के नाम का किराया अनुबंध, साझा बिल या पते के रिकॉर्ड।
- 3उत्तराखंड में रहते हैं तो एक महीने के अंदर राज्य के UCC पोर्टल पर रजिस्ट्रार के पास रिश्ते का रजिस्ट्रेशन कराएँ।
- 4घरवाले धमकाएँ तो 112 पर कॉल करें और पुलिस या हाई कोर्ट से सुरक्षा माँगें।
- 5पार्टनर हिंसा करे तो 181 पर कॉल करें और DV एक्ट में सुरक्षा, रहने और पैसे के लिए अर्ज़ी दें।
- 6बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र दोनों माता-पिता के नाम के साथ बनवाएँ। बच्चा BNSS धारा 144 के तहत पिता से खर्च माँग सकता है।
अपवाद और ज़रूरी बातें
- अगर कोई पार्टनर किसी और से शादीशुदा है, या रिश्ता छोटा या कभी-कभार का है, तो कोर्ट आमतौर पर इसे 'शादी जैसा' नहीं मानते, इसलिए DV एक्ट की राहत शायद न मिले।
- लिव-इन पार्टनर को दूसरे की संपत्ति अपने-आप विरासत में नहीं मिलती। लेकिन अगर जोड़ा कई साल पति-पत्नी की तरह रहा हो, तो कोर्ट मान सकता है कि उनकी शादी हुई थी।
आधिकारिक कानूनी संदर्भ
S. Khushboo v. Kanniammal (2010)
बालिग़ों का बिना शादी साथ रहना अपराध नहीं है।
Indra Sarma v. V.K.V. Sarma (2013)
DV एक्ट में लिव-इन रिश्ता कब 'शादी जैसा' माना जाए, इसके पैमाने।
Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005 — Sections 2(f), 20
'घरेलू संबंध' में शादी जैसा रिश्ता भी शामिल है; ऐसी महिला आर्थिक राहत माँग सकती है।
Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 — Section 144
नाबालिग़ बच्चा, चाहे शादी से हो या नहीं, साधन वाले पिता से गुज़ारा-भत्ता माँग सकता है।
पहले: CrPC Section 125आधिकारिक पाठ पढ़ेंUniform Civil Code, Uttarakhand, 2024
उत्तराखंड में लिव-इन पार्टनर्स को रजिस्ट्रार के पास रिश्ता रजिस्टर कराना होता है; न कराने पर सज़ा हो सकती है।
मदद कहाँ मिलेगी
स्रोत और स्थिति
- कहाँ लागू
- राज्य के अनुसार अलग
- उत्तराखंड की समान नागरिक संहिता (27 जनवरी 2025 से लागू) के तहत वहाँ रहने वाले लिव-इन जोड़ों को एक महीने में रजिस्ट्रेशन कराना होता है; न कराने पर सज़ा हो सकती है। ज़्यादातर दूसरे राज्यों में ऐसा नियम नहीं है।
- कानून लागू होने की तारीख
- 26 अक्टू॰ 2006
- कानूनी समीक्षा
- ड्राफ्ट — वकील की समीक्षा बाकी
यह शैक्षिक जानकारी है, आपके केस के लिए कानूनी सलाह नहीं। सही तथ्य और लागू कानून मायने रखते हैं — कोई कदम उठाने से पहले वकील से बात करें।
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