पुलिस मेरी FIR दर्ज नहीं कर रही है। मैं क्या कर सकता/सकती हूँ?
सीधा जवाब
अगर आपकी शिकायत से संज्ञेय अपराध (जिसमें पुलिस बिना वारंट गिरफ्तार कर सकती है) बनता है, तो आमतौर पर पुलिस को FIR दर्ज करनी ही होगी। मना करे तो लिखित शिकायत डाक से ज़िले के SP को भेजें। वहाँ से भी कुछ न हो तो मजिस्ट्रेट के पास अर्ज़ी दें।
असल ज़िंदगी के उदाहरण
चेन्नई में लक्ष्मी से चाकू दिखाकर लूट हुई। थाने ने सिर्फ़ 'एप्लीकेशन' ली, FIR दर्ज नहीं की। लूट गंभीर संज्ञेय अपराध है, इसलिए लक्ष्मी ने अपनी लिखित शिकायत डाक से SP को भेजी, और SP ने जांच का आदेश दिया।
पार्किंग को लेकर जोसेफ के पड़ोसी ने उसे गालियाँ दीं। पुलिस ने बात रजिस्टर में लिखी और उसे मजिस्ट्रेट के पास जाने को कहा। यह सही हो सकता है: ऐसा अपमान असंज्ञेय अपराध है, इसलिए मजिस्ट्रेट के आदेश के बिना पुलिस इसकी जांच नहीं कर सकती।
आपको क्या करना चाहिए?
- 1शिकायत लिखें: क्या हुआ, कब, कहाँ, किसने किया और किसने देखा। एक कॉपी अपने पास रखें।
- 2थाने में शिकायत दें और FIR व उसकी मुफ्त कॉपी माँगें। मना करें तो अपनी कॉपी पर थाने की रिसीविंग मुहर लगवाएँ।
- 3शिकायत लिखकर रजिस्टर्ड या स्पीड पोस्ट से ज़िले के पुलिस अधीक्षक (SP) को भेजें। डाक की रसीद संभालकर रखें।
- 4SP भी कार्रवाई न करें तो मजिस्ट्रेट के पास हलफ़नामे (affidavit) के साथ अर्ज़ी दें, और साथ में शिकायत व डाक की रसीदें लगाएँ। इसमें वकील की मदद लें।
- 5वकील का खर्च नहीं उठा सकते? मुफ्त कानूनी सहायता के लिए NALSA को 15100 पर कॉल करें। आपात स्थिति में 112 पर कॉल करें।
अपवाद और ज़रूरी बातें
- 3 साल या उससे ज़्यादा लेकिन 7 साल से कम सज़ा वाले अपराधों में पुलिस DSP की अनुमति से पहले 14 दिन तक की प्रारंभिक जांच कर सकती है।
- असंज्ञेय (छोटे) अपराधों में पुलिस सिर्फ़ शिकायत दर्ज करती है और आपको मजिस्ट्रेट के पास भेजती है।
- बलात्कार, एसिड अटैक, चोरी-छिपे देखना/रिकॉर्ड करना (voyeurism) या मानव तस्करी जैसे कुछ गंभीर अपराधों में FIR दर्ज न करना खुद अधिकारी का अपराध है।
आधिकारिक कानूनी संदर्भ
Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 — Section 173(1), (2), (4)
संज्ञेय अपराध की सूचना पुलिस को दर्ज करनी होगी और मुफ्त कॉपी देनी होगी; मना करने पर इसे लिखकर डाक से SP को भेजा जा सकता है।
पहले: CrPC Section 154आधिकारिक पाठ पढ़ेंBharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 — Section 173(3)
3 से 7 साल से कम सज़ा वाले अपराधों में पुलिस DSP की अनुमति से 14 दिन में प्रारंभिक जांच कर सकती है।
Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 — Section 175(3)
पहले SP के पास जाने के बाद, हलफ़नामे के साथ दी गई अर्ज़ी पर मजिस्ट्रेट पुलिस को जांच का आदेश दे सकता है।
पहले: CrPC Section 156(3)आधिकारिक पाठ पढ़ेंBharatiya Nyaya Sanhita, 2023 — Section 199
बलात्कार, एसिड अटैक या मानव तस्करी जैसे तय अपराधों में FIR दर्ज न करने वाले लोक सेवक को 6 महीने से 2 साल की जेल और जुर्माना।
पहले: IPC Section 166Aआधिकारिक पाठ पढ़ेंLalita Kumari v. Govt. of U.P. (2013)
सुप्रीम कोर्ट: सूचना से संज्ञेय अपराध बनता हो तो FIR दर्ज करना ज़रूरी है; प्रारंभिक जांच सिर्फ़ कुछ मामलों में।
मदद कहाँ मिलेगी
स्रोत और स्थिति
- कहाँ लागू
- पूरे भारत में
- कानून लागू होने की तारीख
- 1 जुल॰ 2024
- कानूनी समीक्षा
- ड्राफ्ट — वकील की समीक्षा बाकी
यह शैक्षिक जानकारी है, आपके केस के लिए कानूनी सलाह नहीं। सही तथ्य और लागू कानून मायने रखते हैं — कोई कदम उठाने से पहले वकील से बात करें।
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