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संपत्ति और किराया

अगर कोई बिना वसीयत के गुज़र जाए तो उसकी संपत्ति का क्या होता है?

सीधा जवाब

संपत्ति उस व्यक्ति के पर्सनल लॉ के हिसाब से कानूनी वारिसों को जाती है। हिंदू पुरुष के मामले में पहले 'क्लास I' वारिस, मुख्य रूप से पत्नी, बेटे, बेटियाँ और माँ, बराबर हिस्से पाते हैं। बाकी रिश्तेदारों को तभी मिलता है जब कोई क्लास I वारिस न हो।

असल ज़िंदगी के उदाहरण

रमेश (हिंदू) बिना वसीयत के गुज़रे। पीछे पत्नी, एक बेटा, एक बेटी, माँ और पिता हैं। पत्नी, बेटा, बेटी और माँ को एक-एक चौथाई मिलेगा। पिता क्लास II वारिस हैं, इसलिए रमेश की अपनी संपत्ति में उन्हें कुछ नहीं मिलेगा।

लक्ष्मी को पिता से एक मकान विरासत में मिला था, और वह बिना बच्चों और बिना वसीयत के गुज़र गईं। वह मकान उनके पिता के वारिसों, जैसे माँ, भाई-बहनों को जाएगा, पति को नहीं।

चेन्नई के जोसेफ (ईसाई) बिना वसीयत के गुज़रे; पीछे पत्नी और दो बच्चे हैं। भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम के तहत पत्नी को एक-तिहाई मिलेगा और दोनों बच्चे बाकी दो-तिहाई बराबर बाँटेंगे।

आपको क्या करना चाहिए?

  1. 1नगर निगम या पंचायत ऑफिस से मृत्यु प्रमाण पत्र लें।
  2. 2सभी कानूनी वारिसों की सूची बनाएँ और तहसील या राजस्व ऑफिस से (या राज्य के नियम के अनुसार) वारिस प्रमाण पत्र लें।
  3. 3बैंक जमा, शेयर और मृतक के दूसरे बकाया पैसों के लिए संस्था ज़िला जज से उत्तराधिकार प्रमाण पत्र (सक्सेशन सर्टिफिकेट) माँग सकती है।
  4. 4ज़मीन या मकान के लिए वारिसों के कागज़ों के साथ राजस्व या नगर निगम रिकॉर्ड में दाखिल-खारिज (नाम बदलवाने) की अर्ज़ी दें।
  5. 5वारिसों में असहमति हो तो लिखित पारिवारिक समझौता करें; नहीं तो बंटवारे के केस के लिए वकील से बात करें। मुफ्त कानूनी सहायता: NALSA 15100।

अपवाद और ज़रूरी बातें

  • अगर वैध वसीयत है, तो संपत्ति किसे मिलेगी यह वसीयत तय करेगी, ये नियम नहीं।
  • बैंक खाते या शेयर में नॉमिनी आमतौर पर सिर्फ पैसा लेता है और उसे कानूनी वारिसों के लिए रखता है। बीमा में करीबी परिवार वाले नॉमिनी के नियम अलग हैं।
  • मुस्लिम समुदाय में मुस्लिम पर्सनल लॉ के तय हिस्से लागू होते हैं (बेटी को आमतौर पर बेटे का आधा)। अनुसूचित जनजातियों में आमतौर पर उनके रीति-रिवाज लागू होते हैं, जब तक केंद्र हिंदू कानून लागू न करे।

आधिकारिक कानूनी संदर्भ

  • Hindu Succession Act, 1956 — Sections 8, 9, 10 and Schedule

    हिंदू पुरुष बिना वसीयत: पहले क्लास I वारिस; पत्नी, हर बेटा, हर बेटी और माँ को एक-एक हिस्सा।

  • Hindu Succession Act, 1956 — Sections 15, 16

    हिंदू महिला बिना वसीयत: पहले बच्चे और पति; बच्चे न हों तो माता-पिता से मिली संपत्ति पिता के वारिसों को।

  • Indian Succession Act, 1925 — Sections 31–56

    ईसाई, पारसी और अन्य लोगों के लिए बिना वसीयत उत्तराधिकार के नियम; जैसे, संतान हो तो ईसाई विधवा को एक-तिहाई।

  • Indian Succession Act, 1925 — Section 372

    मृतक के बकाया और प्रतिभूतियाँ (सिक्योरिटीज़) पाने के लिए ज़िला जज से उत्तराधिकार प्रमाण पत्र की अर्ज़ी।

  • Muslim Personal Law (Shariat) Application Act, 1937 — Section 2

    मुस्लिमों में उत्तराधिकार, बिना वसीयत वाले मामलों सहित, मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) से तय होता है।

मदद कहाँ मिलेगी

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पात्र लोगों के लिए मुफ्त वकील और कानूनी सलाह।

स्रोत और स्थिति

कहाँ लागू
राज्य के अनुसार अलग
हिस्से पर्सनल लॉ तय करता है, पर वारिस प्रमाण पत्र, दाखिल-खारिज और खेती की ज़मीन के नियम राज्य के हिसाब से अलग हैं। गोवा का अपना उत्तराधिकार कानून है।
कानून लागू होने की तारीख
17 जून 1956
कानूनी समीक्षा
ड्राफ्ट — वकील की समीक्षा बाकी

यह शैक्षिक जानकारी है, आपके केस के लिए कानूनी सलाह नहीं। सही तथ्य और लागू कानून मायने रखते हैं — कोई कदम उठाने से पहले वकील से बात करें।

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