कोई मुझे धमकी दे रहा है। क्या यह अपराध है?
सीधा जवाब
हाँ, अक्सर। आपको डराने या ज़बरदस्ती कुछ करवाने के लिए आपको, परिवार, संपत्ति या इज़्ज़त को नुकसान की धमकी देना आपराधिक धमकी है। जान से मारने, गंभीर चोट या आग लगाने की धमकी पर 7 साल तक की जेल हो सकती है।
असल ज़िंदगी के उदाहरण
लक्ष्मी का पड़ोसी कहता है, 'शिकायत वापस लो, वरना तुम्हारी दुकान जला दूँगा।' यह आग लगाने की धमकी वाली आपराधिक धमकी है, जिसमें 7 साल तक की सज़ा हो सकती है (BNS 351(3))।
जोसेफ का बिज़नेस पार्टनर कहता है, 'मेरा पैसा दो, वरना कोर्ट में केस करूँगा।' कानूनी हक का इस्तेमाल करने की धमकी, जैसे केस करना, आपराधिक धमकी नहीं है।
तेनज़िन को एक अनजान व्यक्ति से धमकी भरे कॉल आते हैं, जो अपनी पहचान छिपाता है। गुमनाम धमकी पर 2 साल तक की अतिरिक्त सज़ा हो सकती है (BNS 351(4))।
आपको क्या करना चाहिए?
- 1अगर तुरंत खतरा है, तो 112 पर कॉल करें और सुरक्षित जगह जाएँ।
- 2सबूत संभालें: कॉल रिकॉर्डिंग, मैसेज, वॉइस नोट, चिट्ठी, कॉल लॉग, और धमकी सुनने वालों के नाम।
- 3थाने में लिखित शिकायत दें और मुहर लगी कॉपी रखें। सिर्फ धमकी असंज्ञेय अपराध है, इसलिए पुलिस सिर्फ NCR लिख सकती है।
- 4अगर धमकी के साथ वसूली, पीछा करना या मारपीट जैसा कोई और अपराध है, तो पुलिस से वह धारा जोड़कर FIR दर्ज करने को कहें।
- 5पुलिस कार्रवाई न करे, तो न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास शिकायत करें। कार्यकारी मजिस्ट्रेट से भी कह सकते हैं कि उस व्यक्ति से शांति बनाए रखने का बॉन्ड भरवाया जाए।
अपवाद और ज़रूरी बातें
- कानूनी कार्रवाई की बात कहना, जैसे केस करना, लीगल नोटिस भेजना या पुलिस में शिकायत करना, आपराधिक धमकी नहीं है।
- बिना डराने के इरादे से गुस्से में कहे गए शब्द शायद अपराध न हों। लेकिन झगड़ा भड़काने के लिए जानबूझकर किया गया अपमान अपराध हो सकता है (BNS 352)।
आधिकारिक कानूनी संदर्भ
Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 — Section 351
आपराधिक धमकी: 2 साल तक; जान से मारने, गंभीर चोट या आग की धमकी पर 7 साल तक; गुमनाम धमकी पर 2 साल तक और।
पहले: IPC Sections 503, 506, 507आधिकारिक पाठ पढ़ेंBharatiya Nyaya Sanhita, 2023 — Section 352
शांति भंग कराने के इरादे से जानबूझकर अपमान: 2 साल तक, या जुर्माना, या दोनों।
पहले: IPC Section 504आधिकारिक पाठ पढ़ेंBharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 — Section 174
असंज्ञेय मामलों में पुलिस शिकायत दर्ज करके मजिस्ट्रेट के पास भेजती है। अगर केस में एक भी अपराध संज्ञेय है, तो पूरा केस संज्ञेय माना जाता है।
पहले: CrPC Section 155आधिकारिक पाठ पढ़ेंBharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 — Section 126
कार्यकारी मजिस्ट्रेट शांति भंग करने की आशंका वाले व्यक्ति से 1 साल तक शांति बनाए रखने का बॉन्ड भरवा सकते हैं।
पहले: CrPC Section 107आधिकारिक पाठ पढ़ेंBharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 — Section 223
मजिस्ट्रेट को शिकायत: शिकायतकर्ता और गवाहों के शपथ पर बयान होते हैं, और केस लेने से पहले आरोपी को सुना जाता है।
पहले: CrPC Section 200आधिकारिक पाठ पढ़ें
मदद कहाँ मिलेगी
राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन
ऑनलाइन धोखाधड़ी की तुरंत शिकायत करें ताकि पैसा रोका जा सके।
स्रोत और स्थिति
- कहाँ लागू
- पूरे भारत में
- कानून लागू होने की तारीख
- 1 जुल॰ 2024
- कानूनी समीक्षा
- ड्राफ्ट — वकील की समीक्षा बाकी
यह शैक्षिक जानकारी है, आपके केस के लिए कानूनी सलाह नहीं। सही तथ्य और लागू कानून मायने रखते हैं — कोई कदम उठाने से पहले वकील से बात करें।
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