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आपराधिक कानून

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किसी ने झगड़े में मुझे मारा। मैं कौन-सा केस दर्ज करवाऊँ?

सीधा जवाब

आप चोट पहुँचाने का केस कर सकते हैं। मामूली चोट में पुलिस आमतौर पर सिर्फ NCR (असंज्ञेय शिकायत) लिखती है और मामला मजिस्ट्रेट के ज़रिए चलता है। अगर हथियार इस्तेमाल हुआ, हड्डी टूटी या कोई और गंभीर चोट है, तो पुलिस को FIR दर्ज करनी होगी।

असल ज़िंदगी के उदाहरण

पार्किंग के झगड़े में राहुल को थप्पड़ और घूँसे मारे गए। उसे नील पड़े हैं, पर हड्डी नहीं टूटी। यह साधारण चोट है (BNS 115)। पुलिस ने सिर्फ NCR लिखी, इसलिए राहुल ने मजिस्ट्रेट के पास शिकायत की। मजिस्ट्रेट पुलिस को जांच का आदेश भी दे सकते हैं।

आयशा के भाई को लोहे की रॉड से मारा गया और उसका हाथ टूट गया। हड्डी टूटना गंभीर चोट है, और हथियार के इस्तेमाल से अपराध और गंभीर हो जाता है (BNS 118)। यह संज्ञेय अपराध है, इसलिए पुलिस को FIR दर्ज करनी होगी।

गुरप्रीत ने पहले एक आदमी को धक्का दिया, फिर उस आदमी ने घूँसा मारा। गुरप्रीत अपनी चोट की शिकायत कर सकता है, लेकिन सामने वाला आत्मरक्षा का दावा कर सकता है, और गुरप्रीत पर भी केस हो सकता है।

आपको क्या करना चाहिए?

  1. 1पहले अस्पताल में इलाज कराएँ। डॉक्टर को बताएँ कि चोट कैसे लगी, ताकि मेडिको-लीगल केस (MLC) का रिकॉर्ड बने।
  2. 2चोटों और फटे कपड़ों की फोटो लें। गवाहों के नाम और आसपास के CCTV कैमरे नोट करें।
  3. 3जल्दी थाने जाकर लिखित शिकायत दें। FIR की मुफ्त कॉपी माँगें, या अगर सिर्फ NCR बने तो उसका नंबर लें।
  4. 4अगर सिर्फ NCR बनी है, तो न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास शिकायत करें या कोर्ट से जांच का आदेश देने को कहें।
  5. 5गंभीर चोट होने पर भी पुलिस FIR न लिखे, तो अपनी शिकायत डाक से SP को भेजें।
  6. 6वकील का खर्च नहीं उठा सकते? मुफ्त कानूनी सहायता के लिए NALSA को 15100 पर कॉल करें।

अपवाद और ज़रूरी बातें

  • अगर झगड़ा आपने शुरू किया या ज़रूरत से ज़्यादा ताकत से जवाब दिया, तो सामने वाला आत्मरक्षा का दावा कर सकता है और आप पर भी केस हो सकता है।
  • साधारण चोट का केस घायल व्यक्ति सीधे समझौते से खत्म कर सकता है; गंभीर चोट में कोर्ट की अनुमति चाहिए। हथियार से दी गई चोट में कानूनन समझौता (compounding) नहीं हो सकता।

आधिकारिक कानूनी संदर्भ

  • Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 — Sections 114, 115

    चोट यानी शारीरिक दर्द, बीमारी या कमज़ोरी पहुँचाना। जानबूझकर चोट: 1 साल तक की सज़ा, या ₹10,000 तक जुर्माना, या दोनों।

    पहले: IPC Sections 319, 321, 323आधिकारिक पाठ पढ़ें
  • Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 — Sections 116, 117

    गंभीर चोट में हड्डी टूटना, आँख या कान की शक्ति जाना, चेहरे का स्थायी बिगड़ना, या 15 दिन तक तेज़ दर्द शामिल है। 7 साल तक की सज़ा और जुर्माना।

    पहले: IPC Sections 320, 322, 325आधिकारिक पाठ पढ़ें
  • Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 — Section 118

    हथियार, आग, ज़हर, तेज़ाब जैसी चीज़ों से चोट: 3 साल तक। इसी तरह गंभीर चोट: 1 से 10 साल, या उम्रकैद।

    पहले: IPC Sections 324, 326आधिकारिक पाठ पढ़ें
  • Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 — Section 174

    असंज्ञेय मामलों में पुलिस शिकायत दर्ज करके आपको मजिस्ट्रेट के पास भेजती है; जांच सिर्फ मजिस्ट्रेट के आदेश पर हो सकती है।

  • Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 — Section 173

    संज्ञेय अपराधों में FIR, सूचना देने वाले या पीड़ित को मुफ्त कॉपी; थाना मना करे तो SP को शिकायत।

मदद कहाँ मिलेगी

आपातकालीन सेवा

किसी भी आपात स्थिति में पुलिस, फायर या एम्बुलेंस।

एम्बुलेंस

आपातकालीन एम्बुलेंस (अधिकांश राज्यों में)।

नालसा मुफ्त कानूनी सहायता

पात्र लोगों के लिए मुफ्त वकील और कानूनी सलाह।

स्रोत और स्थिति

कहाँ लागू
पूरे भारत में
कानून लागू होने की तारीख
1 जुल॰ 2024
कानूनी समीक्षा
ड्राफ्ट — वकील की समीक्षा बाकी

यह शैक्षिक जानकारी है, आपके केस के लिए कानूनी सलाह नहीं। सही तथ्य और लागू कानून मायने रखते हैं — कोई कदम उठाने से पहले वकील से बात करें।

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