मुझे कोर्ट का समन मिला है। अब मुझे क्या करना चाहिए?
सीधा जवाब
इसे नज़रअंदाज़ न करें। समन का मतलब है कि आपको तय तारीख पर कोर्ट आना है। सिविल केस में न जाने पर कोर्ट आपको सुने बिना (एकतरफा) फैसला कर सकती है। क्रिमिनल केस में कोर्ट गिरफ्तारी का वारंट जारी कर सकती है।
असल ज़िंदगी के उदाहरण
प्रिया को उसके पुराने मकान मालिक के पैसे वाले केस में सिविल समन मिलता है। वह वकील से मिलती है, तारीख पर हाज़िर होती है और तय समय में अपना लिखित जवाब (रिटन स्टेटमेंट) दाखिल करती है।
अब्दुल को चेक बाउंस केस में आरोपी के रूप में समन मिला, पर वह बिना वजह तारीख पर नहीं गया। मजिस्ट्रेट ने वारंट जारी कर दिया। अब अब्दुल को हाज़िर होकर वारंट रद्द करने की अर्ज़ी देनी होगी।
नेहा को WhatsApp पर एक 'कोर्ट समन' आया, जिसमें गिरफ्तारी से बचने के लिए पैसे माँगे गए। असली कोर्ट ऐसे पैसे नहीं माँगती। वह eCourts पर जाँचती है, ऐसा कोई केस नहीं मिलता, और 1930 पर शिकायत करती है।
आपको क्या करना चाहिए?
- 1समन ध्यान से पढ़ें: कोर्ट का नाम, केस नंबर, सुनवाई की तारीख, और आपको प्रतिवादी, आरोपी या गवाह किस रूप में बुलाया गया है।
- 2eCourts पर या कोर्ट दफ्तर में केस की पुष्टि करें। नकली समन वाले फ्रॉड आम हैं।
- 3जल्दी किसी वकील को दिखाएँ। खर्च नहीं उठा सकते? मुफ्त कानूनी सहायता के लिए 15100 पर कॉल करें।
- 4तारीख पर हाज़िर हों। न आ पाने की सच्ची वजह हो, तो वकील के ज़रिए व्यक्तिगत हाज़िरी से छूट की अर्ज़ी दें।
- 5सिविल केस में, समन मिलने के बाद तय समय में, आमतौर पर 30 दिन के अंदर, अपना लिखित जवाब दाखिल करें।
- 6अगर आपकी गैरहाज़िरी में आपके खिलाफ फैसला हो गया, तो उसे रद्द कराने की अर्ज़ी जल्दी दें, आमतौर पर 30 दिन के अंदर।
अपवाद और ज़रूरी बातें
- गवाह का समन अलग है: आपको जाना है और सच बताना है, पर आप पर कोई आरोप नहीं है।
- अगर समन आपको सही तरीके से मिला ही नहीं, तो आप गैरहाज़िरी में हुए फैसले को रद्द करने की माँग कर सकते हैं।
- सही समन मिलने पर भी जानबूझकर कोर्ट न जाना खुद एक अपराध है: 6 महीने तक की जेल, ₹10,000 तक जुर्माना, या दोनों।
आधिकारिक कानूनी संदर्भ
Code of Civil Procedure, 1908 — Order V
सिविल कोर्ट समन कैसे जारी और तामील करती है (हाथ से, डाक, कूरियर या ईमेल), और प्रतिवादी से हाज़िर होकर लिखित जवाब माँगती है।
Code of Civil Procedure, 1908 — Order IX
पक्षकार हाज़िर न हो तो कोर्ट एकतरफा कार्यवाही कर सकती है; नियम 13 के तहत प्रतिवादी एकतरफा डिक्री रद्द कराने की अर्ज़ी दे सकता है।
Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 — Sections 63, 64
क्रिमिनल समन का रूप और उसे कैसे तामील किया जाता है, जिसमें कोर्ट की मुहर वाला इलेक्ट्रॉनिक समन भी शामिल है।
पहले: CrPC Sections 61, 62आधिकारिक पाठ पढ़ेंBharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 — Section 90
व्यक्ति के फरार होने की आशंका हो, या वह बिना उचित वजह तामील हुए समन को नज़रअंदाज़ करे, तो कोर्ट गिरफ्तारी वारंट जारी कर सकती है।
पहले: CrPC Section 87आधिकारिक पाठ पढ़ेंBharatiya Nyaya Sanhita, 2023 — Section 208
कानूनी समन पर जानबूझकर कोर्ट न जाना: 6 महीने तक की साधारण कैद, ₹10,000 तक जुर्माना, या दोनों।
पहले: IPC Section 174आधिकारिक पाठ पढ़ें
मदद कहाँ मिलेगी
राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन
ऑनलाइन धोखाधड़ी की तुरंत शिकायत करें ताकि पैसा रोका जा सके।
स्रोत और स्थिति
- कहाँ लागू
- पूरे भारत में
- कानून लागू होने की तारीख
- 1 जुल॰ 2024
- कानूनी समीक्षा
- ड्राफ्ट — वकील की समीक्षा बाकी
यह शैक्षिक जानकारी है, आपके केस के लिए कानूनी सलाह नहीं। सही तथ्य और लागू कानून मायने रखते हैं — कोई कदम उठाने से पहले वकील से बात करें।
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