प्रोडक्ट ने वो नहीं किया जिसका विज्ञापन में वादा था। मैं क्या कर सकता हूँ?
सीधा जवाब
झूठा या भ्रामक विज्ञापन उपभोक्ता संरक्षण कानून में गैर-कानूनी है। आप उपभोक्ता आयोग में रिफंड और मुआवज़ा मांग सकते हैं। विज्ञापन की शिकायत CCPA से भी कर सकते हैं, जो उसे रुकवा सकता है और कंपनी या प्रचार करने वाले पर ₹10 लाख तक जुर्माना लगा सकता है।
असल ज़िंदगी के उदाहरण
अर्जुन ने एक हेयर ऑयल खरीदा जिसके विज्ञापन में '30 दिन में बाल उगने की गारंटी' थी। तीन बोतल के बाद भी कुछ नहीं बदला। बिना ठीक जांच वाली गारंटी अनुचित व्यापार प्रथा है, और दावे की जांच साबित करना कंपनी का काम है। वह रिफंड और मुआवज़ा मांग सकता है।
तेनज़िन ने 'सस्ते दाम' पर टीवी का विज्ञापन देखा। दुकान पर पता चला कि सिर्फ दो पीस थे और मिनटों में 'खत्म' हो गए। ऐसा सस्ता ऑफर दिखाना, जिसे ठीक मात्रा में देने का इरादा ही न हो, अनुचित व्यापार प्रथा है।
एक फिल्म स्टार ने 'चमत्कारी' गोरेपन की क्रीम का प्रचार किया, जिसका आयशा पर कोई असर नहीं हुआ। अगर स्टार ने प्रचार से पहले दावों की ठीक से जांच की थी, तो वह जुर्माने से बच सकता है। आयशा फिर भी विक्रेता और कंपनी से रिफंड मांग सकती है।
आपको क्या करना चाहिए?
- 1विज्ञापन (स्क्रीनशॉट, वीडियो लिंक या अखबार की कटिंग), बिल और दावे वाला पैकेट संभालकर रखें।
- 2कंपनी को लिखकर रिफंड मांगें और विज्ञापन में किया गया दावा हूबहू लिखें।
- 31915 या NCH ऐप पर विज्ञापन की शिकायत करें, या ज़िला कलेक्टर या CCPA को लिखित शिकायत भेजें।
- 4अपने रिफंड और मुआवज़े के लिए ई-जागृति पर उपभोक्ता शिकायत करें। आप सुधार वाला विज्ञापन (करेक्टिव ऐड) चलवाने की मांग भी कर सकते हैं।
अपवाद और ज़रूरी बातें
- 'बहुत स्वादिष्ट' जैसी आम राय को चुनौती देना आमतौर पर मुश्किल है। आंकड़े, गारंटी या 'क्लिनिकली प्रूवन' जैसे साफ वादों को परखना आसान है।
- प्रचार करने वाले ने दावों की ठीक से जांच की थी तो उस पर जुर्माना नहीं लगता। आम कारोबार में विज्ञापन छापने वाले प्रकाशक को भी बचाव मिलता है, जब तक उसे पहले से CCPA के आदेश की जानकारी न हो।
- अगर नतीजा इस्तेमाल के तरीके पर निर्भर था और आपने निर्देश नहीं माने, तो आपका केस कमज़ोर हो सकता है।
आधिकारिक कानूनी संदर्भ
Consumer Protection Act, 2019 — Section 2(28)
भ्रामक विज्ञापन: जो सामान का झूठा वर्णन करे, झूठी गारंटी दे, प्रकृति या क्वालिटी पर गुमराह करे, या ज़रूरी जानकारी छिपाए।
Consumer Protection Act, 2019 — Section 21
CCPA भ्रामक विज्ञापन रुकवा या बदलवा सकता है, कंपनी या प्रचारक पर ₹10 लाख (दोबारा पर ₹50 लाख) तक जुर्माना और प्रचारक पर रोक लगा सकता है।
Consumer Protection Act, 2019 — Section 89
झूठा विज्ञापन कराने वाले निर्माता या सेवा देने वाले को 2 साल तक जेल और ₹10 लाख तक जुर्माना; दोबारा पर 5 साल और ₹50 लाख।
Consumer Protection Act, 2019 — Sections 2(47)(i), 39(1)
झूठे दावे और बिना जांची गारंटी अनुचित व्यापार प्रथा हैं; आयोग रिफंड, मुआवज़ा और सुधार वाले विज्ञापन का आदेश दे सकता है।
Guidelines for Prevention of Misleading Advertisements and Endorsements for Misleading Advertisements, 2022
सही विज्ञापन की शर्तें: लालच वाले झूठे ऑफर नहीं, 'फ्री' का ईमानदार दावा, दावे को न काटने वाले डिस्क्लेमर, और प्रचारक की जांच-पड़ताल।
मदद कहाँ मिलेगी
राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन
विक्रेता या सेवा देने वाली कंपनी से शिकायत सुलझाने में मुफ्त मदद।
ई-जागृति (उपभोक्ता आयोग ई-फाइलिंग)
जिला, राज्य या राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग में ऑनलाइन केस दर्ज करें।
स्रोत और स्थिति
- कहाँ लागू
- पूरे भारत में
- कानून लागू होने की तारीख
- 24 जुल॰ 2020
- कानूनी समीक्षा
- ड्राफ्ट — वकील की समीक्षा बाकी
यह शैक्षिक जानकारी है, आपके केस के लिए कानूनी सलाह नहीं। सही तथ्य और लागू कानून मायने रखते हैं — कोई कदम उठाने से पहले वकील से बात करें।