मैंने खराब सामान खरीदा और दुकानदार उसे बदलने या पैसे लौटाने से मना कर रहा है।
सीधा जवाब
आप हक से मांग सकते हैं। खराब सामान वापस लेने और बिल में लिखे समय (कुछ न लिखा हो तो 30 दिन) में पैसे लौटाने से मना करना कानून में 'अनुचित व्यापार प्रथा' है। 'बिका माल वापस नहीं होगा' का बोर्ड खराब सामान पर आपका यह हक खत्म नहीं करता।
असल ज़िंदगी के उदाहरण
चेन्नई की लक्ष्मी ने मिक्सर-ग्राइंडर खरीदा। दूसरे हफ्ते में उसकी मोटर बंद हो गई और दुकानदार ने 'नो रिफंड' बोर्ड दिखा दिया। लक्ष्मी ने दुकान और कंपनी को लिखित शिकायत भेजी, फिर बदलने या रिफंड और मुआवज़े के लिए जिला उपभोक्ता आयोग में केस किया।
अर्जुन ने एक शर्ट खरीदी, एक बार पहनी और फिर उसे रंग पसंद नहीं आया। शर्ट में कोई खराबी नहीं है, इसलिए कानून दुकान को उसे वापस लेने के लिए मजबूर नहीं करता। बदलना दुकान की अपनी रिटर्न पॉलिसी पर निर्भर है।
गुरप्रीत का नया प्रेशर कुकर पहली बार में ही फट गया और उसका हाथ जल गया। रिफंड के अलावा, वह 'प्रोडक्ट लायबिलिटी' नियमों के तहत चोट का मुआवज़ा निर्माता कंपनी से मांग सकती है। इन नियमों में मुख्य सवाल यह है कि सामान खराब था या नहीं।
आपको क्या करना चाहिए?
- 1बिल, वारंटी कार्ड और डिब्बा संभालकर रखें। खराबी की साफ फोटो या वीडियो बना लें।
- 2दुकान और कंपनी के कस्टमर केयर को लिखित शिकायत भेजें (ईमेल या रजिस्टर्ड डाक)। तय तारीख तक मरम्मत, बदलने या रिफंड की मांग करें।
- 3कुछ न हो तो राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन 1915 पर कॉल करें या NCH ऐप इस्तेमाल करें। यह मुफ्त है और कोर्ट से पहले मामला सुलझाने की कोशिश करती है।
- 4फिर भी बात न बने तो ई-जागृति पर जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत करें। ₹5 लाख तक की खरीद पर कोई फीस नहीं लगती।
- 5मरम्मत या नया सामान, ब्याज के साथ रिफंड, और परेशानी का मुआवज़ा मांगें। आप खुद अपना केस लड़ सकते हैं।
अपवाद और ज़रूरी बातें
- अगर सामान दोबारा बेचने या व्यापार के लिए खरीदा है, तो आप इस कानून में 'उपभोक्ता' नहीं हैं। सिर्फ अपनी रोज़ी-रोटी कमाने के लिए खुद इस्तेमाल करना इसमें आता है।
- अगर सामान आपने खुद तोड़ा, गलत इस्तेमाल किया या साफ निर्देश नहीं माने, तो दुकानदार और कंपनी ज़िम्मेदार नहीं भी हो सकते।
- दिक्कत होने के 2 साल के अंदर शिकायत करें। देर से करने पर देरी की ठोस वजह बतानी होगी।
आधिकारिक कानूनी संदर्भ
Consumer Protection Act, 2019 — Section 2(7)
उपभोक्ता कौन: अपने इस्तेमाल के लिए खरीदने वाला, दोबारा बेचने या व्यापार के लिए नहीं; रोज़ी-रोटी के लिए खुद इस्तेमाल चलता है।
Consumer Protection Act, 2019 — Section 2(10)
'खराबी' की परिभाषा: कानून, कॉन्ट्रैक्ट या विक्रेता के दावे के मुताबिक क्वालिटी, मात्रा, शुद्धता या मानक में कोई कमी।
Consumer Protection Act, 2019 — Section 2(47)(viii)
अनुचित व्यापार प्रथा: खराब सामान वापस लेकर बिल में लिखे समय, या न लिखा हो तो 30 दिन में, पैसे लौटाने से मना करना।
Consumer Protection Act, 2019 — Section 39(1)
आयोग खराबी ठीक करने, सामान बदलने, ब्याज सहित रिफंड, मुआवज़ा और खर्च का आदेश दे सकता है।
Consumer Protection Act, 2019 — Sections 83, 84
प्रोडक्ट लायबिलिटी: बनावट या डिज़ाइन की खराबी, वारंटी टूटने या चेतावनी न देने से हुए नुकसान का मुआवज़ा निर्माता देगा।
मदद कहाँ मिलेगी
राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन
विक्रेता या सेवा देने वाली कंपनी से शिकायत सुलझाने में मुफ्त मदद।
ई-जागृति (उपभोक्ता आयोग ई-फाइलिंग)
जिला, राज्य या राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग में ऑनलाइन केस दर्ज करें।
स्रोत और स्थिति
- कहाँ लागू
- पूरे भारत में
- कानून लागू होने की तारीख
- 20 जुल॰ 2020
- कानूनी समीक्षा
- ड्राफ्ट — वकील की समीक्षा बाकी
यह शैक्षिक जानकारी है, आपके केस के लिए कानूनी सलाह नहीं। सही तथ्य और लागू कानून मायने रखते हैं — कोई कदम उठाने से पहले वकील से बात करें।