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जल्दी करें

अगर मैं किसी हादसे में घायल की मदद करूँ, तो क्या पुलिस मुझे परेशान करेगी?

सीधा जवाब

नहीं। कानून नेक इरादे से मदद करने वाले (गुड समैरिटन) की रक्षा करता है। मदद के बावजूद घायल को नुकसान हो या मौत हो जाए, तो आप ज़िम्मेदार नहीं। कोई आपको नाम बताने, गवाह बनने या इलाज का पैसा देने पर मजबूर नहीं कर सकता, और आप तुरंत जा सकते हैं।

असल ज़िंदगी के उदाहरण

जयपुर के पास हाईवे पर आयशा ने एक बाइक सवार को खून से लथपथ देखा। उसने 112 पर कॉल किया और उसे पास के अस्पताल ले गई। अस्पताल ने बिना पैसे या नाम पूछे इलाज शुरू किया, और जो देखा था वह बताकर आयशा चली गई।

राहुल ने खुद एक साइकिल सवार को टक्कर मारी और फिर उसे अस्पताल ले गया। वह गुड समैरिटन नहीं है। ड्राइवर होने के नाते उसे फिर भी पुलिस को हादसे की जानकारी देनी होगी और बीमा कंपनी को बताना होगा।

आपको क्या करना चाहिए?

  1. 1112 (या एम्बुलेंस के लिए 108) पर कॉल करें और सही जगह बताएँ।
  2. 2सुरक्षित हो तो घायल को पास के अस्पताल ले जाएँ। चोट के बाद पहला घंटा (गोल्डन ऑवर) सबसे ज़रूरी होता है।
  3. 3पुलिस या अस्पताल को बताएँ कि आपने क्या देखा। नाम और फोन नंबर देना आपकी मर्ज़ी है।
  4. 4मदद का सबूत चाहिए? अस्पताल से उसके लेटरहेड पर पावती मांगें।
  5. 5अगर आप गवाह बनने को तैयार हैं, तो अपने घर या काम की जगह पर, अपनी सुविधा के समय पूछताछ की मांग करें।
  6. 6अगर आपने किसी की जान बचाई, तो ज़िला प्रशासन से सरकार के राह-वीर पुरस्कार (₹25,000 और प्रमाणपत्र) के बारे में पूछें।

अपवाद और ज़रूरी बातें

  • यह सुरक्षा उन लोगों के लिए है जो अपनी मर्ज़ी से, नेक इरादे से और बिना इनाम की उम्मीद के मदद करते हैं। हादसा करने वाले ड्राइवर पर यह लागू नहीं।
  • अगर आप गवाह बनना चुनते हैं, तो बयान और शायद गवाही देनी होगी। नियम हलफनामे पर गवाही और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़्यादा इस्तेमाल की इजाज़त देते हैं।

आधिकारिक कानूनी संदर्भ

  • Motor Vehicles Act, 1988 — Section 134A

    मदद करते समय हुई लापरवाही से घायल की चोट या मौत के लिए गुड समैरिटन पर सिविल या आपराधिक ज़िम्मेदारी नहीं।

  • Central Motor Vehicles Rules, 1989 — Rules 168, 169

    गुड समैरिटन के अधिकार: पहचान बताने की मजबूरी नहीं, इलाज का खर्च नहीं, तुरंत जाने की छूट; गवाह के रूप में पूछताछ का तरीका।

  • SaveLIFE Foundation v. Union of India (2016)

    सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की गुड समैरिटन गाइडलाइंस को कानून बनने तक पूरे देश में कानूनी ताकत दी।

  • Pt. Parmanand Katara v. Union of India (1989)

    डॉक्टरों को पुलिस की कार्रवाई का इंतज़ार किए बिना घायलों का तुरंत इलाज करना होगा।

मदद कहाँ मिलेगी

आपातकालीन सेवा

किसी भी आपात स्थिति में पुलिस, फायर या एम्बुलेंस।

एम्बुलेंस

आपातकालीन एम्बुलेंस (अधिकांश राज्यों में)।

स्रोत और स्थिति

कहाँ लागू
पूरे भारत में
कानून लागू होने की तारीख
1 अक्टू॰ 2020
कानूनी समीक्षा
ड्राफ्ट — वकील की समीक्षा बाकी

यह शैक्षिक जानकारी है, आपके केस के लिए कानूनी सलाह नहीं। सही तथ्य और लागू कानून मायने रखते हैं — कोई कदम उठाने से पहले वकील से बात करें।

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