पुलिस ने मुझे गवाह के तौर पर थाने बुलाया है। क्या जाना ज़रूरी है?
सीधा जवाब
अक्सर हाँ, अगर लिखित आदेश मिला है और आप उस थाने या पड़ोसी थाने के इलाके में रहते हैं। लेकिन महिलाओं, 15 से कम या 60 से ज़्यादा उम्र के पुरुषों, दिव्यांगों और गंभीर बीमारों को थाने आने पर मजबूर नहीं किया जा सकता; पुलिस उनके घर पर पूछताछ करेगी।
असल ज़िंदगी के उदाहरण
कोच्चि में जोसेफ ने अपनी दुकान के बाहर एक बाइक चोरी होते देखी। जांच अधिकारी ने उसे थाने आने का लिखित आदेश दिया। जोसेफ गया, जो देखा वह बताया, और उससे बयान पर साइन नहीं करवाया गया।
पुलिस ने 67 साल के हरबंस सिंह को गवाह के तौर पर थाने बुलाया। उनकी उम्र 60 से ज़्यादा है, इसलिए उन्हें थाने जाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। पुलिस को उनके घर पर पूछताछ करनी होगी, जब तक वे खुद जाना न चाहें।
गवाह के तौर पर पूछताछ में आयशा से ऐसा सवाल पूछा गया जिसका जवाब उसे आरोपी बना सकता था। वह उस सवाल का जवाब देने से मना कर सकती है, पर बाकी सवालों के सच्चे जवाब देने होंगे।
आपको क्या करना चाहिए?
- 1आदेश लिखित में माँगें। केस नंबर, धारा (179) और अधिकारी का नाम देखें।
- 2अगर आप महिला हैं, 15 साल से कम या 60 साल से ज़्यादा उम्र के पुरुष हैं, दिव्यांग हैं या गंभीर बीमार हैं, तो पुलिस से घर पर पूछताछ करने को कहें।
- 3तय समय पर अपना ID लेकर जाएँ, और परिवार के किसी सदस्य को बताएँ कि आप कहाँ जा रहे हैं।
- 4जो जानते हैं, वही सच-सच बताएँ। जिन सवालों के जवाब से आप पर आपराधिक आरोप लग सकता है, उनका जवाब देना ज़रूरी नहीं।
- 5अपने बयान पर साइन न करें: कानून कहता है कि पुलिस को दिए बयान पर साइन नहीं करवाया जाता। पूछें कि क्या आने-जाने का खर्च मिलेगा।
- 6अगर पुलिस आपको संदिग्ध की तरह देखने लगे, धमकाए या जुर्म कबूल करने का दबाव डाले, तो तुरंत वकील से संपर्क करें।
अपवाद और ज़रूरी बातें
- अगर नोटिस धारा 35 का है, तो आपको गवाह नहीं, संदिग्ध माना जा रहा है। वकील से बात करें।
- पुलिस इस तरह सिर्फ़ अपने या पास के थाने के इलाके में रहने वाले गवाहों को बुला सकती है।
- बिना ठोस वजह जानबूझकर सही लिखित आदेश को नज़रअंदाज़ करना अपराध हो सकता है, जिसमें 1 महीने तक की जेल या ₹5,000 तक का जुर्माना हो सकता है।
आधिकारिक कानूनी संदर्भ
Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 — Section 179
पुलिस लिखित आदेश से गवाह बुला सकती है; महिलाओं, 15 से कम या 60+ उम्र के पुरुषों, दिव्यांग या गंभीर बीमार लोगों को घर से बाहर नहीं बुला सकती।
पहले: CrPC Section 160आधिकारिक पाठ पढ़ेंBharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 — Sections 180, 181
गवाह को सच जवाब देना होगा, सिवाय खुद को फँसाने वाले सवालों के; बयान का वीडियो बन सकता है; पुलिस को दिए बयान पर साइन नहीं होता।
पहले: CrPC Sections 161, 162आधिकारिक पाठ पढ़ेंBharatiya Sakshya Adhiniyam, 2023 — Section 23
पुलिस अधिकारी के सामने, या पुलिस हिरासत में (मजिस्ट्रेट के सामने के अलावा) किया गया इकबालिया बयान आरोपी के खिलाफ़ साबित नहीं किया जा सकता।
पहले: IEA Sections 25, 26, 27आधिकारिक पाठ पढ़ेंConstitution of India — Article 20(3)
किसी अपराध के आरोपी को खुद के खिलाफ़ गवाह बनने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 — Section 208
सक्षम लोक सेवक के नोटिस या आदेश पर कानूनन हाज़िर होना ज़रूरी हो और जानबूझकर न जाएँ: 1 महीने तक जेल, ₹5,000 तक जुर्माना, या दोनों।
पहले: IPC Section 174आधिकारिक पाठ पढ़ें
मदद कहाँ मिलेगी
स्रोत और स्थिति
- कहाँ लागू
- राज्य के अनुसार अलग
- घर से दूर बुलाए गए गवाहों का आने-जाने का खर्च राज्य के नियमों के तहत मिलता है, इसलिए यह राज्य के हिसाब से अलग है। बयान दर्ज करने के पुलिस नियम भी अलग हो सकते हैं।
- कानून लागू होने की तारीख
- 1 जुल॰ 2024
- कानूनी समीक्षा
- ड्राफ्ट — वकील की समीक्षा बाकी
यह शैक्षिक जानकारी है, आपके केस के लिए कानूनी सलाह नहीं। सही तथ्य और लागू कानून मायने रखते हैं — कोई कदम उठाने से पहले वकील से बात करें।
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