शराब पीकर गाड़ी चलाते पकड़े गए तो क्या होगा?
सीधा जवाब
अगर ब्रेथ या खून की जांच में 100 ml खून में 30 mg से ज़्यादा शराब मिले, या नशीली दवा की वजह से आप ठीक से गाड़ी न चला पाएँ, तो यह अपराध है। पहली बार: 6 महीने तक जेल या ₹10,000 जुर्माना, या दोनों। दोबारा: 2 साल तक जेल या ₹15,000, या दोनों।
असल ज़िंदगी के उदाहरण
कोच्चि में एक शादी में जोसेफ ने कुछ ड्रिंक लीं और गाड़ी चलाकर घर निकला। ब्रेथ एनालाइज़र में 100 ml में 45 mg निकला। पुलिस ने लाइसेंस ज़ब्त करके RTO भेजा, जो उसे निलंबित कर सकता है, और केस कोर्ट गया।
बेंगलुरु में विक्रम को शराब पीकर गाड़ी चलाने पर गिरफ्तार किया गया, लेकिन दो घंटे से ज़्यादा तक किसी डॉक्टर ने जांच नहीं की। कानून कहता है कि ऐसे गिरफ्तार व्यक्ति की दो घंटे में मेडिकल जांच हो, वरना उसे छोड़ना होगा।
आपको क्या करना चाहिए?
- 1शराब पीकर गाड़ी न चलाएँ। कैब लें, बिना पिए किसी व्यक्ति से चलवाएँ, या वहीं रुकें।
- 2रोके जाने पर ब्रेथ टेस्ट में सहयोग करें। रीडिंग, समय, जगह और अधिकारी का नाम नोट करें।
- 3गिरफ्तार हों तो मेडिकल जांच की मांग करें। यह दो घंटे के अंदर होनी चाहिए।
- 4चालान और ज़ब्त लाइसेंस की पावती लें। उस पावती के भरोसे गाड़ी नहीं चला सकते।
- 5दी गई तारीख पर कोर्ट जाएँ। वकील से बात करें, खासकर अगर किसी को चोट लगी हो। मुफ्त कानूनी मदद के लिए NALSA को 15100 पर कॉल करें।
अपवाद और ज़रूरी बातें
- अगर किसी को चोट लगे या मौत हो, तो पुलिस BNS की धाराएँ भी लगा सकती है, जैसे लापरवाही से मौत, जिसमें 5 साल तक जेल है।
- शराब पीकर गाड़ी चलाने का मामला मौके पर या ऑनलाइन जुर्माना भरकर नहीं निपटता। सज़ा सिर्फ कोर्ट तय कर सकता है।
आधिकारिक कानूनी संदर्भ
Motor Vehicles Act, 1988 — Section 185
100 ml खून में 30 mg से ज़्यादा शराब या नशे में गाड़ी: 6 महीने तक या ₹10,000 या दोनों; दोबारा: 2 साल तक या ₹15,000 या दोनों।
Motor Vehicles Act, 1988 — Section 202
वर्दी में पुलिस शराब पीकर गाड़ी चलाने पर बिना वारंट गिरफ्तार कर सकती है; दो घंटे में मेडिकल जांच न हो तो छोड़ना होगा।
Motor Vehicles Act, 1988 — Sections 19, 206(4)
पुलिस लाइसेंस ज़ब्त करके लाइसेंसिंग अधिकारी को भेजती है, जो ड्राइवर को अयोग्य कर सकता है या लाइसेंस रद्द कर सकता है।
Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 — Sections 106(1), 125
लापरवाही से मौत (5 साल तक जेल और जुर्माना), और जान खतरे में डालने या चोट पहुँचाने वाले लापरवाह काम।
पहले: IPC Sections 304A, 336, 337, 338आधिकारिक पाठ पढ़ें
मदद कहाँ मिलेगी
स्रोत और स्थिति
- कहाँ लागू
- पूरे भारत में
- कानून लागू होने की तारीख
- 1 सित॰ 2019
- कानूनी समीक्षा
- ड्राफ्ट — वकील की समीक्षा बाकी
यह शैक्षिक जानकारी है, आपके केस के लिए कानूनी सलाह नहीं। सही तथ्य और लागू कानून मायने रखते हैं — कोई कदम उठाने से पहले वकील से बात करें।