क्या बेटियों का पिता की संपत्ति में बराबर हिस्सा होता है?
सीधा जवाब
हाँ, हिंदू, सिख, जैन और बौद्ध परिवारों में। 2005 से बेटी का संयुक्त परिवार (पैतृक) संपत्ति में बेटे जितना ही जन्म से हक है, चाहे वह शादीशुदा हो या नहीं। पिता की खुद कमाई संपत्ति में बराबर हिस्सा तभी मिलता है जब पिता बिना वसीयत के गुज़रें।
असल ज़िंदगी के उदाहरण
प्रिया शादीशुदा है और इंदौर में रहती है। भाई कहते हैं कि संयुक्त ज़मीन में उसका हिस्सा नहीं है क्योंकि पिता 2001 में, यानी 2005 के बदलाव से पहले गुज़र गए। सुप्रीम कोर्ट कह चुका है कि 2005 में पिता का ज़िंदा होना ज़रूरी नहीं। ज़मीन का कभी बंटवारा नहीं हुआ, इसलिए प्रिया अपना हिस्सा माँग सकती है।
गुरप्रीत के पिता ने अपनी कमाई से फ्लैट खरीदा और एक वैध वसीयत में उसे बेटे के नाम कर दिया। फ्लैट खुद कमाया हुआ था और वसीयत बनी थी, इसलिए गुरप्रीत उसमें बराबर हिस्सा नहीं माँग सकती, जब तक वसीयत को चुनौती देकर रद्द न कराया जाए।
आपको क्या करना चाहिए?
- 1पता करें कि संपत्ति संयुक्त परिवार (पैतृक) की है या पिता की खुद कमाई। सेल डीड, राजस्व रिकॉर्ड और बंटवारे के कागज़ इकट्ठा करें।
- 2परिवार से लिखकर अपना हिस्सा माँगें। दबाव में हक त्याग (रिलीज़ डीड) या 'नो ऑब्जेक्शन' पर साइन न करें।
- 3ज़मीन और नगर निगम के रिकॉर्ड जाँचें। दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) में नाम छूट गया हो तो तहसील या नगर निगम में आपत्ति दें।
- 4परिवार मना करे तो सिविल कोर्ट में बंटवारे के केस के बारे में वकील से बात करें।
- 5वकील का खर्च नहीं उठा सकते? मुफ्त कानूनी सहायता के लिए NALSA को 15100 पर कॉल करें।
अपवाद और ज़रूरी बातें
- 20 दिसंबर 2004 से पहले रजिस्टर्ड डीड या कोर्ट डिक्री से हुआ बंटवारा दोबारा नहीं खुलता। ज़ुबानी बंटवारा आमतौर पर तभी माना जाता है जब सरकारी रिकॉर्ड से साबित हो।
- कई संपत्तियाँ जिन्हें लोग 'पैतृक' कहते हैं, कानूनन पिता की अपनी होती हैं, जैसे 1956 के बाद उन्हें अपने पिता से विरासत में मिली संपत्ति। वह उसे वसीयत से किसी को भी दे सकते हैं।
- मुस्लिम, ईसाई और पारसी समुदायों के उत्तराधिकार कानून अलग हैं। हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम अनुसूचित जनजातियों पर तब तक लागू नहीं होता जब तक केंद्र सरकार अधिसूचना न दे।
आधिकारिक कानूनी संदर्भ
Hindu Succession Act, 1956 — Section 6 (as substituted in 2005)
मिताक्षरा संयुक्त परिवार में बेटी जन्म से सहदायिक (कोपार्सनर) है, उसके हक और ज़िम्मेदारियाँ बेटे जैसी हैं।
Hindu Succession Act, 1956 — Sections 8, 30 and Schedule
वसीयत न हो तो हिंदू पुरुष की संपत्ति पहले क्लास I वारिसों (बेटे, बेटियाँ, पत्नी, माँ आदि) को; हिंदू वसीयत से संपत्ति दे सकता है।
Vineeta Sharma v. Rakesh Sharma (2020)
सुप्रीम कोर्ट: बेटियाँ जन्म से सहदायिक हैं; 9 सितंबर 2005 को पिता का ज़िंदा होना ज़रूरी नहीं।
मदद कहाँ मिलेगी
स्रोत और स्थिति
- कहाँ लागू
- राज्य के अनुसार अलग
- जन्म से हक का नियम मिताक्षरा संयुक्त परिवारों के लिए है। दायभाग मानने वाले परिवारों (मुख्यतः बंगाल) में हक मृत्यु पर मिलता है, और केरल ने 1975 में संयुक्त परिवार खत्म किए। खेती की ज़मीन के लिए राज्य के भूमि कानून भी देखें।
- कानून लागू होने की तारीख
- 9 सित॰ 2005
- कानूनी समीक्षा
- ड्राफ्ट — वकील की समीक्षा बाकी
यह शैक्षिक जानकारी है, आपके केस के लिए कानूनी सलाह नहीं। सही तथ्य और लागू कानून मायने रखते हैं — कोई कदम उठाने से पहले वकील से बात करें।