जल्दी करें
पुलिस ने मेरे साथ बदसलूकी की या मुझे मारा। मैं शिकायत कहाँ करूँ?
सीधा जवाब
सबसे पहले इलाज कराएँ और मेडिकल रिकॉर्ड लें। फिर SP या पुलिस कमिश्नर, मजिस्ट्रेट, या राज्य/राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को लिखित शिकायत करें। कुछ राज्यों में पुलिस शिकायत प्राधिकरण भी है। जुर्म कबूल करवाने के लिए मारना अपराध है।
असल ज़िंदगी के उदाहरण
पटना के एक थाने में अर्जुन को चोरी कबूल करवाने के लिए थप्पड़ और लातें मारी गईं। उसने सरकारी अस्पताल से चोट की रिपोर्ट ली और SP व राज्य मानवाधिकार आयोग को शिकायत की।
लक्ष्मी के बेटे की पुलिस हिरासत में मौत हो गई। कानून के अनुसार पुलिस जांच के साथ-साथ मजिस्ट्रेट को भी मौत की जांच करनी होगी, और 24 घंटे के अंदर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजना होगा।
राकेश ने पुलिस की पिटाई की शिकायत मानवाधिकार आयोग में दो साल बाद की। आयोग आमतौर पर एक साल के बाद मामले नहीं लेता, इसलिए उसके वकील ने मजिस्ट्रेट के पास शिकायत दायर की।
आपको क्या करना चाहिए?
- 1सरकारी अस्पताल में इलाज कराएँ और मेडिको-लीगल (MLC) रिपोर्ट माँगें। चोटों की फोटो लें।
- 2तारीख, समय, जगह, अधिकारियों के नाम या बैज नंबर, और गवाहों के नाम लिख लें।
- 3SP या पुलिस कमिश्नर को लिखित शिकायत भेजें, और भेजने का सबूत संभालकर रखें।
- 4एक साल के अंदर राज्य मानवाधिकार आयोग या NHRC में शिकायत करें। NHRC ऑनलाइन शिकायत भी लेता है।
- 5मजिस्ट्रेट के पास शिकायत के बारे में, और थाने की CCTV फुटेज सुरक्षित रखवाने की माँग के बारे में वकील से पूछें।
- 6अगर कोई अभी गैर-कानूनी हिरासत में है या खतरे में है, तो 112 पर कॉल करें और तुरंत वकील से संपर्क करें।
अपवाद और ज़रूरी बातें
- मानवाधिकार आयोग आमतौर पर एक साल से पुरानी घटनाओं की जांच नहीं करते, पर कोर्ट का रास्ता खुला रहता है।
- ड्यूटी के दौरान किए गए काम पर शिकायत में, कार्रवाई से पहले मजिस्ट्रेट को उस अधिकारी का पक्ष और सीनियर अधिकारी की रिपोर्ट लेनी होती है।
- हर बदसलूकी अपराध नहीं होती। रूखा बर्ताव या देरी आमतौर पर विभागीय शिकायत से निपटाई जाती है।
आधिकारिक कानूनी संदर्भ
Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 — Section 120
इकबालिया बयान या जानकारी उगलवाने के लिए चोट पहुँचाना: 7 साल तक; गंभीर चोट: 10 साल तक की सज़ा। दोनों में जुर्माना भी।
पहले: IPC Sections 330, 331आधिकारिक पाठ पढ़ेंBharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 — Sections 175(4), 223(2)
ड्यूटी से जुड़े काम पर लोक सेवक के खिलाफ़ शिकायत में कार्रवाई से पहले मजिस्ट्रेट सीनियर अधिकारी की रिपोर्ट और उस अधिकारी का पक्ष लेगा।
Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 — Section 196(2)
पुलिस हिरासत में किसी की मौत हो जाए, वह गायब हो जाए, या महिला से बलात्कार का आरोप हो, तो मजिस्ट्रेट को जांच करनी होगी।
पहले: CrPC Section 176(1A)आधिकारिक पाठ पढ़ेंProtection of Human Rights Act, 1993 — Sections 12, 36(2)
मानवाधिकार आयोग मानवाधिकार उल्लंघन की शिकायतों की जांच कर सकते हैं, पर एक साल से पुराने मामलों की नहीं।
Prakash Singh v. Union of India (2006)
सुप्रीम कोर्ट: राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण बनाएँ, जो हिरासत में हिंसा जैसी गंभीर पुलिस गड़बड़ियों की जांच करें।
मदद कहाँ मिलेगी
स्रोत और स्थिति
- कहाँ लागू
- राज्य के अनुसार अलग
- पुलिस शिकायत प्राधिकरण सिर्फ़ कुछ राज्यों में बने हैं, और उनकी शक्तियाँ अलग-अलग हैं। राज्य मानवाधिकार आयोग और सीनियर पुलिस अफ़सरों को शिकायत का तरीका भी राज्य के हिसाब से अलग है।
- कानून लागू होने की तारीख
- 1 जुल॰ 2024
- कानूनी समीक्षा
- ड्राफ्ट — वकील की समीक्षा बाकी
यह शैक्षिक जानकारी है, आपके केस के लिए कानूनी सलाह नहीं। सही तथ्य और लागू कानून मायने रखते हैं — कोई कदम उठाने से पहले वकील से बात करें।
जुड़े हुए सवाल
पुलिस और FIRजल्दी करें
अगर मुझे गिरफ्तार किया जाए तो मेरे क्या अधिकार हैं?
पुलिस और FIR
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मेरे पास वकील के पैसे नहीं हैं। मुफ्त कानूनी सहायता कैसे मिलेगी?
संविधान
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संविधान
अनुच्छेद 21 (जीवन और निजी आज़ादी का अधिकार) में क्या-क्या आता है?