मुझे दिया गया चेक बाउंस हो गया। अब क्या करें?
सीधा जवाब
अगर चेक किसी असली कर्ज़ या देनदारी के लिए था, तो आप क्रिमिनल केस कर सकते हैं। बैंक का रिटर्न मेमो मिलने के 30 दिन में लिखित डिमांड नोटिस भेजें। नोटिस मिलने के 15 दिन में भुगतान न हो, तो अगले एक महीने में शिकायत करें।
असल ज़िंदगी के उदाहरण
करन ने एक दोस्त को ₹2 लाख उधार दिए, जिसने चुकाने के लिए चेक दिया। चेक 'अपर्याप्त राशि' के कारण बाउंस हो गया। करन ने 30 दिन में नोटिस भेजा; 15 दिन में पैसे नहीं आए, तो उसने मजिस्ट्रेट के सामने शिकायत दर्ज की।
विक्रम का सप्लायर को दिया चेक बाउंस हो गया। नोटिस मिलने के बाद उसने 15 दिन के अंदर पूरी रकम चुका दी। समय पर भुगतान करने से कोई अपराध नहीं बनता।
थॉमस के चाचा ने जन्मदिन पर तोहफे में चेक दिया, जो बाउंस हो गया। यह किसी कर्ज़ के लिए नहीं था, इसलिए चेक बाउंस का केस नहीं बनता।
आपको क्या करना चाहिए?
- 1असली चेक और बैंक का रिटर्न मेमो (जिसमें बाउंस की वजह लिखी है) संभालकर रखें।
- 2मेमो मिलने के 30 दिन के अंदर चेक देने वाले को रजिस्टर्ड पोस्ट या स्पीड पोस्ट से लिखित डिमांड नोटिस भेजें। रसीदें संभालकर रखें।
- 3नोटिस मिलने के दिन से 15 दिन इंतज़ार करें। अगर पूरा भुगतान हो जाए, तो मामला खत्म।
- 4भुगतान न हो तो उन 15 दिनों के बाद एक महीने के अंदर, उस कोर्ट में मजिस्ट्रेट के सामने शिकायत करें जहाँ आपकी बैंक शाखा है।
- 5कोर्ट से अंतरिम मुआवज़ा माँगें; ट्रायल के दौरान कोर्ट चेक की रकम का 20% तक दिला सकती है।
- 6समझौते या लोक अदालत से निपटारे पर भी सोचें। कागज़ी कार्रवाई के लिए वकील से बात करें।
अपवाद और ज़रूरी बातें
- अगर चेक किसी कानूनी रूप से वसूल होने वाले कर्ज़ या देनदारी के लिए नहीं था, जैसे तोहफा, तो क्रिमिनल केस नहीं बनता।
- शिकायत की एक महीने की समय-सीमा निकल गई? पर्याप्त कारण दिखाने पर कोर्ट देर से की गई शिकायत ले सकती है। आप पैसे की वसूली के लिए सिविल केस भी कर सकते हैं।
- चेक उसकी वैधता के अंदर जमा होना चाहिए, जो आमतौर पर उस पर लिखी तारीख से 3 महीने होती है।
आधिकारिक कानूनी संदर्भ
Negotiable Instruments Act, 1881 — Section 138
कर्ज़ वाला चेक बाउंस होना अपराध है, अगर 30 दिन में नोटिस के बाद 15 दिन में भुगतान न हो; 2 साल तक जेल, दोगुना जुर्माना, या दोनों।
Negotiable Instruments Act, 1881 — Section 142
चेक पाने वाले को कारण पैदा होने के एक महीने में, अपनी बैंक शाखा वाले इलाके के मजिस्ट्रेट के सामने लिखित शिकायत करनी होती है।
Negotiable Instruments Act, 1881 — Sections 143A, 148
ट्रायल में कोर्ट 20% तक अंतरिम मुआवज़ा दिला सकती है; अपील में दोषी चेक देने वाले को कम से कम 20% जमा करना पड़ सकता है।
Negotiable Instruments Act, 1881 — Section 147
चेक बाउंस के अपराध शमनीय हैं: पक्षकार समझौते से इन्हें खत्म कर सकते हैं।
Code of Civil Procedure, 1908 — Order XXXVII
चेक, प्रोनोट जैसे लिखित दस्तावेज़ों पर बकाया पैसे की जल्दी वसूली के लिए समरी (संक्षिप्त) सिविल केस।
मदद कहाँ मिलेगी
स्रोत और स्थिति
- कहाँ लागू
- पूरे भारत में
- कानून लागू होने की तारीख
- 1 अप्रैल 1989
- कानूनी समीक्षा
- ड्राफ्ट — वकील की समीक्षा बाकी
यह शैक्षिक जानकारी है, आपके केस के लिए कानूनी सलाह नहीं। सही तथ्य और लागू कानून मायने रखते हैं — कोई कदम उठाने से पहले वकील से बात करें।