कानून समझोभारतीय कानून, आसान भाषा में
कोर्ट की प्रक्रिया

कोर्ट का फैसला मेरे खिलाफ आया। क्या अपील हो सकती है?

सीधा जवाब

आमतौर पर हाँ, पर जल्दी करें। सिविल केस में पहली अपील आमतौर पर 30 दिन में, और हाई कोर्ट में हो तो 90 दिन में करनी होती है। दोषी ठहराया गया व्यक्ति ऊपरी कोर्ट में अपील कर सकता है, और पीड़ित बरी होने के खिलाफ। लोक अदालत के अवॉर्ड की अपील नहीं होती।

असल ज़िंदगी के उदाहरण

सुरेश सिविल जज की कोर्ट में पैसे का केस हार गया। वह 30 दिन में ज़िला कोर्ट में पहली अपील दायर करता है। डिक्री की प्रमाणित कॉपी लेने में लगे दिन नहीं गिने जाते।

सुनीता को मजिस्ट्रेट ने दोषी ठहराकर 2 साल की सज़ा दी। वह सेशंस कोर्ट में अपील करती है और अपील चलने तक सज़ा रोकने और ज़मानत की माँग करती है।

बाबू समझौते पर राज़ी हुआ और कोर्ट ने उन्हीं शर्तों पर डिक्री दी। बाद में उसका मन बदल गया, पर दोनों पक्षों की सहमति से बनी डिक्री के खिलाफ अपील नहीं होती।

आपको क्या करना चाहिए?

  1. 1फैसले और डिक्री की प्रमाणित कॉपी के लिए तुरंत आवेदन करें; इसे पाने में लगा समय सीमा में नहीं गिना जाता।
  2. 2सही अपील कोर्ट पता करें: ज़िला कोर्ट, सेशंस कोर्ट या हाई कोर्ट; यह केस, फैसला देने वाली कोर्ट और केस की रकम पर निर्भर है।
  3. 3अपनी समय-सीमा गिनें: सिविल अपील 30 दिन (हाई कोर्ट में 90); क्रिमिनल अपील आमतौर पर सेशंस कोर्ट में 30 दिन, हाई कोर्ट में 60 दिन।
  4. 4वकील से साफ आधारों के साथ अपील तैयार कराएँ। खर्च नहीं उठा सकते? मुफ्त कानूनी सहायता के लिए 15100 पर कॉल करें।
  5. 5अगर सज़ा हुई है, तो अपील कोर्ट से अपील चलने तक सज़ा रोकने और ज़मानत की माँग करें।
  6. 6समय-सीमा निकल गई? अपील के साथ कारण बताते हुए देरी माफी की अर्ज़ी लगाएँ।

अपवाद और ज़रूरी बातें

  • सहमति से बनी डिक्री या लोक अदालत के अवॉर्ड के खिलाफ अपील नहीं होती, न ही बहुत छोटे जुर्माने या कम सज़ा वाले कुछ छोटे क्रिमिनल केसों में।
  • हाई कोर्ट में दूसरी सिविल अपील सिर्फ कानून के किसी महत्वपूर्ण सवाल पर होती है, तथ्यों पर दोबारा बहस के लिए नहीं।
  • जहाँ अपील नहीं होती, वहाँ उसी कोर्ट में रिव्यू या ऊपरी कोर्ट में रिवीज़न का रास्ता हो सकता है। वकील से पूछें।

आधिकारिक कानूनी संदर्भ

  • Code of Civil Procedure, 1908 — Sections 96, 100

    डिक्री के खिलाफ पहली अपील ऊपरी कोर्ट में; हाई कोर्ट में दूसरी अपील सिर्फ कानून के महत्वपूर्ण सवाल पर।

  • Limitation Act, 1963 — Section 12; Schedule, Article 116

    सिविल अपील: हाई कोर्ट में 90 दिन, बाकी कोर्ट में 30 दिन; कॉपी लेने में लगा समय नहीं गिना जाता।

  • Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 — Section 415

    दोषी व्यक्ति मजिस्ट्रेट के फैसले के खिलाफ सेशंस कोर्ट में, और सेशंस कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील कर सकता है।

  • Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 — Section 413 (proviso)

    पीड़ित आरोपी के बरी होने, कम गंभीर अपराध में सज़ा, या कम मुआवज़े के खिलाफ अपील कर सकता है।

    पहले: CrPC Section 372 (proviso)आधिकारिक पाठ पढ़ें
  • Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 — Section 430

    अपील कोर्ट अपील चलने तक सज़ा निलंबित कर सकती है और दोषी को ज़मानत पर छोड़ सकती है।

मदद कहाँ मिलेगी

नालसा मुफ्त कानूनी सहायता

पात्र लोगों के लिए मुफ्त वकील और कानूनी सलाह।

ई-कोर्ट सेवाएँ

CNR नंबर से केस की स्थिति, अगली तारीख और आदेश देखें।

स्रोत और स्थिति

कहाँ लागू
पूरे भारत में
कानून लागू होने की तारीख
1 जुल॰ 2024
कानूनी समीक्षा
ड्राफ्ट — वकील की समीक्षा बाकी

यह शैक्षिक जानकारी है, आपके केस के लिए कानूनी सलाह नहीं। सही तथ्य और लागू कानून मायने रखते हैं — कोई कदम उठाने से पहले वकील से बात करें।

जुड़े हुए सवाल