कोई मेरे बारे में झूठी बातें फैला रहा है। क्या मानहानि का केस हो सकता है?
सीधा जवाब
हाँ। आप मजिस्ट्रेट के पास आपराधिक शिकायत, हर्जाने के लिए सिविल केस, या दोनों कर सकते हैं। पुलिस खुद मानहानि का केस शुरू नहीं कर सकती; जिसकी बदनामी हुई, उसे कोर्ट में शिकायत करनी होती है। जनहित में कही गई सच्ची बात मानहानि नहीं है।
असल ज़िंदगी के उदाहरण
लक्ष्मी की पड़ोसन सबसे कहती है कि लक्ष्मी ने मंदिर का पैसा चुराया, जो झूठ है। लक्ष्मी BNS 356 के तहत मजिस्ट्रेट के पास शिकायत करती है। साबित होने पर कोर्ट 2 साल तक की साधारण कैद, जुर्माना या सामुदायिक सेवा की सज़ा दे सकती है।
अर्जुन फोटो के साथ एक सच्चा रिव्यू डालता है कि रेस्टोरेंट ने बासी खाना परोसा। अगर बात सच है और लोगों के हित में है, या नेकनीयती से दी गई उचित राय है, तो यह आमतौर पर मानहानि नहीं है।
फ़ातिमा का पुराना सहकर्मी ऑफिस के WhatsApp ग्रुप में उसके बारे में झूठा मैसेज भेजता है। ऑनलाइन मैसेज भी मानहानि हो सकते हैं। मैसेज डिलीट होने से पहले वह भेजने वाले, ग्रुप और तारीख वाले स्क्रीनशॉट ले लेती है।
आपको क्या करना चाहिए?
- 1सबूत संभालें: तारीख और लिंक वाले स्क्रीनशॉट, रिकॉर्डिंग, अखबार की कटिंग, और सुनने-पढ़ने वालों के नाम।
- 2वकील के ज़रिए लीगल नोटिस भेजें कि वह व्यक्ति ऐसा करना बंद करे, पोस्ट हटाए और माफ़ी माँगे।
- 3आपराधिक केस के लिए अपने सबूत और गवाहों के साथ न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास शिकायत करें। केस लेने से पहले कोर्ट आरोपी को भी सुनेगी।
- 4पैसों के हर्जाने के लिए सिविल केस करें, आमतौर पर बात छपने या बोले जाने के 1 साल के अंदर।
- 5ऑनलाइन पोस्ट हो तो प्लेटफ़ॉर्म पर भी रिपोर्ट करें ताकि उसे हटाया जा सके।
अपवाद और ज़रूरी बातें
- जनहित में सच कहना, नेकनीयती से उचित राय देना, या पुलिस या किसी अधिकारी से नेकनीयती से शिकायत करना मानहानि नहीं है।
- आपराधिक शिकायत आमतौर पर 3 साल के अंदर करनी होती है। आमतौर पर सिर्फ वही व्यक्ति शिकायत कर सकता है जिसकी बदनामी हुई, कोई दोस्त या पुलिस नहीं।
आधिकारिक कानूनी संदर्भ
Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 — Section 356
मानहानि की परिभाषा और 10 अपवाद (जैसे जनहित में सच)। 2 साल तक साधारण कैद, या जुर्माना, या दोनों, या सामुदायिक सेवा।
पहले: IPC Sections 499, 500, 501, 502आधिकारिक पाठ पढ़ेंBharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 — Section 222
कोर्ट मानहानि का केस सिर्फ बदनाम हुए व्यक्ति की शिकायत पर लेती है; कुछ खास हालात में ही कोई और, कोर्ट की अनुमति से, शिकायत कर सकता है।
पहले: CrPC Section 199आधिकारिक पाठ पढ़ेंBharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 — Section 223
मजिस्ट्रेट शिकायतकर्ता का शपथ पर बयान लेते हैं और केस लेने से पहले आरोपी को सुनवाई का मौका देते हैं।
पहले: CrPC Section 200आधिकारिक पाठ पढ़ेंLimitation Act, 1963 — Schedule, Articles 75, 76
लिखित (libel) या बोली गई (slander) मानहानि का सिविल केस: छपने या बोले जाने से 1 साल के अंदर।
Subramanian Swamy v. Union of India (2016)
सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक मानहानि को संवैधानिक माना, यानी इज़्ज़त बचाने के लिए बोलने की आज़ादी पर उचित रोक।
मदद कहाँ मिलेगी
स्रोत और स्थिति
- कहाँ लागू
- पूरे भारत में
- कानून लागू होने की तारीख
- 1 जुल॰ 2024
- कानूनी समीक्षा
- ड्राफ्ट — वकील की समीक्षा बाकी
यह शैक्षिक जानकारी है, आपके केस के लिए कानूनी सलाह नहीं। सही तथ्य और लागू कानून मायने रखते हैं — कोई कदम उठाने से पहले वकील से बात करें।