कानून समझोभारतीय कानून, आसान भाषा में
पुलिस और FIR

जल्दी करें

मुझे गिरफ्तारी का डर है। अग्रिम ज़मानत क्या है?

सीधा जवाब

अग्रिम ज़मानत (anticipatory bail) गिरफ्तारी से पहले कोर्ट का ऐसा आदेश है कि अगर आप गिरफ्तार हुए तो आपको ज़मानत पर छोड़ा जाएगा। गैर-ज़मानती अपराध में गिरफ्तारी का डर हो तो आप सेशन कोर्ट या हाई कोर्ट में अर्ज़ी दे सकते हैं। कोर्ट शर्तें लगा सकता है।

असल ज़िंदगी के उदाहरण

जोसेफ के पुराने बिज़नेस पार्टनर ने उसके खिलाफ धोखाधड़ी की शिकायत की। गिरफ्तारी के डर से जोसेफ के वकील ने सेशन कोर्ट में अर्ज़ी दी, और कोर्ट ने इस शर्त पर अग्रिम ज़मानत दी कि बुलाने पर वह जांच में शामिल होगा।

फ़ातिमा लापरवाही से गाड़ी चलाने के केस में अग्रिम ज़मानत चाहती थी। उसके वकील ने समझाया कि इसकी ज़रूरत नहीं: यह ज़मानती अपराध है, इसलिए गिरफ्तार होने पर बेल उसका हक़ है।

आपको क्या करना चाहिए?

  1. 1FIR की कॉपी या शिकायत की जानकारी, और केस झूठा या बढ़ा-चढ़ाकर होने के सबूत इकट्ठा करें।
  2. 2जल्दी किसी क्रिमिनल वकील से अग्रिम ज़मानत की अर्ज़ी के बारे में बात करें, जो आमतौर पर पहले सेशन कोर्ट में दी जाती है।
  3. 3वकील से पूछें कि क्या अंतिम सुनवाई तक कोर्ट गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा दे सकता है।
  4. 4अग्रिम ज़मानत मिले तो आदेश की कॉपी साथ रखें और हर शर्त मानें, जैसे जांच में शामिल होना।
  5. 5वकील का खर्च नहीं उठा सकते? मुफ्त कानूनी सहायता के लिए NALSA को 15100 पर कॉल करें।

अपवाद और ज़रूरी बातें

  • 16 साल से कम उम्र की लड़की से बलात्कार या 18 साल से कम उम्र की लड़की से सामूहिक बलात्कार में यह नहीं मिलती। SC/ST एक्ट में भी यह रोक है, जब तक पहली नज़र में केस न बनता हो।
  • यह सिर्फ़ गैर-ज़मानती अपराधों के लिए है। ज़मानती अपराध में बेल पहले से आपका हक़ है।
  • कोर्ट इसे मना कर सकता है, सीमित कर सकता है, या शर्तें तोड़ने पर बाद में रद्द कर सकता है।

आधिकारिक कानूनी संदर्भ

  • Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 — Section 482(1)-(3)

    गैर-ज़मानती अपराध में गिरफ्तारी से डरने वाले व्यक्ति को सेशन कोर्ट या हाई कोर्ट शर्तों के साथ गिरफ्तारी पर ज़मानत का आदेश दे सकता है।

  • Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 — Section 482(4)

    BNS धारा 65 (16 साल से कम की लड़की से बलात्कार) और धारा 70(2) (18 साल से कम की लड़की से सामूहिक बलात्कार) के आरोप में अग्रिम ज़मानत नहीं।

  • Scheduled Castes and the Scheduled Tribes (Prevention of Atrocities) Act, 1989 — Sections 18, 18A

    इस कानून के अपराधों पर अग्रिम ज़मानत का प्रावधान लागू नहीं होता।

  • Prathvi Raj Chauhan v. Union of India (2020)

    सुप्रीम कोर्ट: SC/ST एक्ट की रोक सही ठहराई, पर पहली नज़र में केस न बनता हो तो कोर्ट अग्रिम ज़मानत दे सकता है।

  • Sushila Aggarwal v. State (NCT of Delhi) (2020)

    सुप्रीम कोर्ट: अग्रिम ज़मानत किसी तय समय तक सीमित होना ज़रूरी नहीं; कोर्ट सीमा न लगाए तो यह ट्रायल खत्म होने तक चल सकती है।

मदद कहाँ मिलेगी

नालसा मुफ्त कानूनी सहायता

पात्र लोगों के लिए मुफ्त वकील और कानूनी सलाह।

स्रोत और स्थिति

कहाँ लागू
पूरे भारत में
कानून लागू होने की तारीख
1 जुल॰ 2024
कानूनी समीक्षा
ड्राफ्ट — वकील की समीक्षा बाकी

यह शैक्षिक जानकारी है, आपके केस के लिए कानूनी सलाह नहीं। सही तथ्य और लागू कानून मायने रखते हैं — कोई कदम उठाने से पहले वकील से बात करें।

जुड़े हुए सवाल